शरीर को ऊर्जा देने में वसा की अहम भूमिका होती है, लेकिन जब यही वसा खून में जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है तो ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ने लगता है। लंबे समय तक हाई ट्राइग्लिसराइड मधुमेह, मोटापा, जोड़ों के दर्द और हृदय रोग जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल में अंतर
अक्सर लोग ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग तरह के फैट हैं।
ट्राइग्लिसराइड शरीर में ऊर्जा के रूप में जमा होता है और जरूरत पड़ने पर उपयोग होता है।
कोलेस्ट्रॉल कोशिकाओं के निर्माण, हार्मोन और विटामिन बनाने में मदद करता है।
खून में ट्राइग्लिसराइड का सामान्य स्तर आमतौर पर 150 mg/dL से कम माना जाता है। इससे अधिक होने पर सावधानी जरूरी है।
ट्राइग्लिसराइड क्यों बढ़ता है?
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:
जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट का सेवन
मोटापा
जंक और प्रोसेस्ड फूड
शारीरिक गतिविधि की कमी
शराब और तंबाकू का सेवन
बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना
इसे नियंत्रित कैसे करें?
1. कार्बोहाइड्रेट संतुलित रखें
अगर आपकी शारीरिक गतिविधि कम है, तो अनाज और हाई-कार्ब फूड सीमित मात्रा में लें।
2. हेल्दी फैट शामिल करें
देसी घी, सरसों का तेल और एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल सीमित मात्रा में उपयोग किए जा सकते हैं।
3. नियमित व्यायाम
रोज कम से कम 45–60 मिनट की वॉक, योग या कोई भी एक्सरसाइज मददगार हो सकती है।
4. इंटरमिटेंट फास्टिंग
कुछ लोगों के लिए 14–16 घंटे का अंतराल रखकर खाना (डॉक्टर की सलाह से) फायदेमंद हो सकता है।
जरूरी सावधानी
अगर ट्राइग्लिसराइड काफी ज्यादा है या पहले से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी है, तो खुद से उपाय करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर दवाएं भी दी जाती हैं।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही जीवनशैली से ट्राइग्लिसराइड को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है।
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