Last Updated: September 23, 2026

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अब इस नाम से जाना जायेगा ‘केरल’, मोदी कैबिनेट ने लगाई अंतिम मुहर

February 24, 2026

अब इस नाम से जाना जायेगा ‘केरल’, मोदी कैबिनेट ने लगाई अंतिम मुहर

नेशनल डेस्क: केंद्र सरकार ने केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बता दें कि आज (24 फरवरी 2026) को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस ऐतिहासिक फैसले पर अंतिम मुहर लगाई गई। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य के गठन के समय से ही यह मांग उठती रही है कि स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक परंपरा के अनुरूप राज्य का नाम ‘केरलम’ किया जाए।

चुनाव से पहले बड़ा निर्णय

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य में इस वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम का सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन लंबे समय से इस बदलाव के पक्षधर रहे हैं। उनका तर्क रहा है कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा की आत्मा और राज्य की ऐतिहासिक पहचान को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है।

विधानसभा का प्रस्ताव और केंद्र की प्रक्रिया

राज्य विधानसभा ने 24 जून 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से नाम परिवर्तन की औपचारिक स्वीकृति मांगी थी। इससे पहले अगस्त 2023 में भी ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी संशोधनों की सलाह दी थी। संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजे जाने के बाद अब केंद्र ने इसे स्वीकार कर लिया है।

‘सेवा तीर्थ’ में पहली कैबिनेट बैठक

यह फैसला नए प्रधानमंत्री कार्यालय भवन ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में लिया गया। Prime Minister’s Office के नए परिसर में हुई इस बैठक को प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर विभिन्न स्तरों से समर्थन मिला था। राजीव चंद्रशेखर, जो भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, ने भी इस वर्ष की शुरुआत में पत्र लिखकर नाम परिवर्तन की मांग का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि ‘केरलम’ नाम राज्य की सांस्कृतिक विरासत और भाषाई गौरव को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है।

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अब इस प्रस्ताव को संवैधानिक औपचारिकताओं के तहत लागू किया जाएगा। संभावना है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद सभी सरकारी दस्तावेजों, मानचित्रों और प्रशासनिक अभिलेखों में नए नाम का प्रयोग शुरू हो जाएगा। इस निर्णय को राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श का भी केंद्र बन सकता है।

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