
नई दिल्ली: केरल के अभयारण्यम की 18 महीने की हथिनी के बच्चे, माया, जुलाई में गिरने के बाद से खड़ी नहीं हो पा रही है। आज उसे बेहतर इलाज और देखभाल के लिए कोच्चि से ‘वनतारा’ ले जाया जा रहा है। वह छोटी है, बहादुर है, और उसे हम सबकी ज़रूरत है। कृपया माया के ठीक होने और उसके बचने के लिए प्रार्थना करें
एक छोटा हाथी जो खड़ा नहीं हो सकता, उसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ता है। लंबे समय तक लेटे रहने से उसके शरीर पर दबाव पड़ता है, जिससे सांस लेने और खाना पचाने में कठिनाई होती है, साथ ही शरीर पर घाव (प्रेशर सोर) हो सकते हैं और मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। इस उम्र के हाथी के बच्चे को विशेष खान-पान और लगातार देखभाल की भी जरूरत होती है।

वन विभाग के अधिकारियों ने विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड की देखरेख में हर दिन माया की देखभाल की है। फिर भी उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, और अब उसे लंबे समय तक गहन देखभाल (इंटेंसिव केयर) की जरूरत है। वंतारा की टीम बहुत कम समय के नोटिस पर अभयारण्यम पहुंच गई। उनके पशु चिकित्सकों ने वन अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ मिलकर माया की जांच की। इस संयुक्त जांच के बाद, दोनों टीमें इस बात पर सहमत हुईं कि उसके इलाज और ठीक होने का सबसे अच्छा मौका यही है कि उसे वंतारा ले जाया जाए।
अब माया को कोच्चि हवाई अड्डे से जामनगर स्थित वंतारा ले जाया जा रहा है (एयरलिफ्ट किया जा रहा है), जहां उसे गहन देखभाल मिलेगी। मेडिकल बोर्ड के सदस्य और वन अधिकारी उसके साथ यात्रा कर रहे हैं, और सफर के दौरान उसकी देखभाल की पूरी योजना भी मिलकर बनाई गई है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...