शिमला : राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि सूबे के शिक्षण संस्थानों में छह छंदों युक्त वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। प्रदेश के 30 वें राज्यपाल के पद की शपथ लेने के बाद कविंद्र गुप्ता शिमला में पत्रकारों के साथ संवाद कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि उन्हें स्वयं वंदे मातरम के केवल दो ही छंद याद हैं। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसकी वजह पढ़ाई के दौरान हमें अधिकतर मुगलों का इतिहास पढ़ाया जाना रही। उन्होंने कहा कि देशभक्ति और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी चीजों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
प्रदेश के विकास के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए पक्ष और विपक्ष को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करना होगा। उनका मानना है कि संवाद के माध्यम से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यह है कि हिमाचल प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़े और इस लक्ष्य में सरकार तथा विपक्ष दोनों की समान भूमिका होनी चाहिए। कविंद्र गुप्ता ने कहा कि वह अक्सर कहते हैं कि किसी पद का अंतिम लक्ष्य केवल सिंहासन पर चढ़ते जाना नहीं होता, बल्कि समाज को साथ लेकर आगे बढ़ना होता है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल की संस्कृति, सभ्यता और बोली यहां की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। साथ ही धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी प्रदेश में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। राज्यपाल ने कहा कि इस दिशा में वह प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से भी संवाद करेंगे। प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि शुरुआत में केंद्र सरकार सहायता दे सकती है, लेकिन राज्य को अंतत: अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। पर्यटन, जल और जंगल जैसे क्षेत्रों में पर्यावरण के अनुकूल निवेश से राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
राज्यपाल ने कहा कि पूर्व राज्यपालों द्वारा शुरू किए गए नशामुक्ति और प्राकृतिक खेती से जुड़े अभियानों को आगे भी जारी रखा जाएगा। साथ ही गुणवत्ता शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा ताकि युवाओं को रोजगार देने वाले पाठ्यRमों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने बताया कि वह अगले तीन से चार महीनों में प्रदेश के सभी जिलों का दौरा भी करेंगे।