नई दिल्लीः मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में इस समय हालात काफी तनावपूर्ण हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र की शांति को प्रभावित किया है। इसका असर सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे समय में भारत भी हालात पर नजर रखते हुए सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की अहम बातचीत
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति बनाए रखना और भारत से जुड़े हितों की रक्षा करना था।
ईरान के राष्ट्रपति से क्या हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति से मिडिल ईस्ट की स्थिति पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और तनाव चिंता का विषय है। आम लोगों की जान-माल का नुकसान हो रहा है। बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। भारत ने साफ कहा कि वह शांति और स्थिरता चाहता है और सभी देशों को बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
Had a conversation with Iranian President, Dr. Masoud Pezeshkian, to discuss the serious situation in the region.
Expressed deep concern over the escalation of tensions and the loss of civilian lives as well as damage to civilian infrastructure.
The safety and security of…
— Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मिडिल ईस्ट में लाखों भारतीय काम करते हैं और कई भारतीय कंपनियां भी वहां सक्रिय हैं। ऐसे में सरकार लगातार हालात पर नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी है। भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
तेल आपूर्ति और व्यापार पर फोकस
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से पूरा करता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से प्रधानमंत्री मोदी ने तेल और जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रखने पर जोर दिया। समुद्री व्यापार के रास्तों को सुरक्षित रखने की बात की। यह सुनिश्चित करने को कहा कि व्यापार में कोई बाधा न आए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण
मौजूदा हालात में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे ज्यादा चिंता का विषय बना हुआ है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग एक-तिहाई तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत ने ईरान से इस रास्ते को सुरक्षित और खुला रखने का अनुरोध किया है।
भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा
हाल ही में मिडिल ईस्ट में कई जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इसको देखते हुए भारत ने अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। इस दौरान समुद्री सुरक्षा पर खास चर्चा हुई है। व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच पिछले कुछ दिनों में कई बार बातचीत हो चुकी है, जिसमें इन मुद्दों पर लगातार चर्चा की जा रही है।
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