Last Updated: September 23, 2026

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‘पिछली सरकारों ने पांडुलिपियों की उपेक्षा की’, सम्राट संप्रति संग्रहालय के उद्घाटन पर बोले पीएम मोदी

March 31, 2026

‘पिछली सरकारों ने पांडुलिपियों की उपेक्षा की’, सम्राट संप्रति संग्रहालय के उद्घाटन पर बोले पीएम मोदी

गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भगवान महावीर की जयंती पर गांधीनगर के कोबा तीर्थ में स्थित सम्राट संप्रति संग्रहालय का उद्घाटन किया। इस दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछली सरकारों ने बहुमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण की उपेक्षा की थी।

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‘जैन दर्शन-भारतीय संस्कृति प्राचीन धरोहर का एक पवित्र केंद्र’

जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “आज भगवान महावीर जयंती के पावन पर्व पर मुझे इस पवित्र जैन तीर्थ आने का सौभाग्य मिला है। सर्वप्रथम मैं भगवान महावीर के चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं कोबा तीर्थ से सभी देशवासियों को भगवान महावीर जयंती की शुभकामनाएं देता हूं। मुझे खुशी है कि हजारों वर्ष की भारतीय विरासत, जैन धर्म का समयातीत ज्ञान, हमारी धरोहरें और उनसे मिलने वाली प्रेरणाएं, आने वाली सदियों तक अमर बनाने के लिए नए और आधुनिक रूप में अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हमारे संतों ने इस जैन हेरिटेज म्यूजियम की संकल्पना की। आज यह संकल्पना एक भव्य रूप में साकार हो रही है। यह सम्राट संप्रति संग्रहालय, जैन दर्शन, भारतीय संस्कृति और हमारी प्राचीन धरोहर का एक पवित्र केंद्र बना है। मैं इस अद्वितीय प्रयास के लिए हमारे सभी जैन संतों का अभिनंदन करता हूं। सम्राट संप्रति संग्रहालय भारत के कोटि-कोटि लोगों की धरोहर है।”

 

ये भारत के गौरवशाली अतीत की धरोहर

पीएम मोदी ने आगे कहा, “जहां एक ओर कुछ शासकों ने हिंसा को हथियार बनाकर शासन किया, वहीं सम्राट संप्रति ने सिंहासन पर बैठकर अहिंसा का विस्तार किया। उन्होंने सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह का प्रचार-प्रसार किया। इतने निस्वार्थ भाव से शासन को सेवा का माध्यम मानकर जीवन जीना, यह सीख हमें भारत के अतीत से ही मिलती है। ये भारत के गौरवशाली अतीत की धरोहर है। भारत में ज्ञान हमेशा से एक मुक्त प्रवाह रहा है। हर युग में तीर्थंकरों और ऋषियों-मनीषियों का अवतार हुआ। ज्ञान का संकलन बढ़ता चला गया। समय के साथ बहुत कुछ नया जुड़ता गया।”

‘पिछली सरकारों ने पांडुलिपियों की उपेक्षा की, हम सुधार रहे’

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम पिछली सरकारों की उन गलतियों को सुधार रहे हैं, जिन्होंने बहुमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण की उपेक्षा की थी। इस गलती को सुधारने के लिए हमने ज्ञान भारतम मिशन शुरू किया है, जिसमें आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके उन्हें संरक्षित किया जा रहा है। इन प्रयासों में उच्च गुणवत्ता वाली स्कैनिंग, रासायनिक उपचार और व्यापक डिजिटल संग्रहों का निर्माण शामिल है, जिनका उद्देश्य हमारी समृद्ध विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।”

यह अवसर 10 संकल्पों को दोहराने का

पीएम मोदी ने कहा, “आज का यह अवसर 10 संकल्पों को दोहराने का है। पहला संकल्प: पानी बचाने का, दूसरा-एक पेड़ मां के नाम, तीसरा- स्वच्छता का मिशन, चौथा -वोकल फॉर लोकल, पांचवां -देश दर्शन, छठा -प्राकृतिक खेती को अपनाना, सातवां -स्वस्थ जीवनशैली को अपनाना, आठवां -योग और खेल को जीवन में लाना, नौवां -गरीबों की सहायता का संकल्प और दसवां- भारत की विरासत का संकल्प,जो आप सभी ने स्वयं से जोड़ लिया है।”

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