Last Updated: October 9, 2026

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विश्व बैंक के अध्यक्ष ने नौकरी बढ़ाने का किया समर्थन, भारत के सहकारिता क्षेत्र का किया जिक्र

April 10, 2026

विश्व बैंक के अध्यक्ष ने नौकरी बढ़ाने का किया समर्थन, भारत के सहकारिता क्षेत्र का किया जिक्र

इंटरनेशनल डेस्क। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भारत के सहकारिता क्षेत्र (कोऑपरेटिव सेक्टर) को वैश्विक स्तर पर विकास का एक बेहतरीन मॉडल बताया है। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन को दुनिया भर की विकास रणनीतियों का मुख्य केंद्र होना चाहिए। वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सालाना स्प्रिंग मीटिंग से पहले अटलांटिक काउंसिल में बोलते हुए, बंगा ने कहा कि विकास की कोशिशों को अलग-अलग प्रोजेक्ट्स से हटाकर रोजगार और आर्थिक मौके पर केंद्रित बड़े नतीजों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास कोई चैरिटी नहीं है। यह एक रणनीति है। वृद्धि और स्थिरता बनाए रखने के लिए नौकरियां बनाना जरूरी है।

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अजय बंगा ने एक बड़ी डेमोग्राफिक चुनौती पर जोर दिया और कहा कि अगले 15 सालों में 1.2 बिलियन युवाओं के काम करने की उम्र तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि बहुत कम नौकरियां बनने की संभावना है। अगर इन युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिलते हैं, तो यह समझना जरूरी है कि नौकरी ही व्यक्ति को सम्मान और उम्मीद देती है। बंगा ने जॉब क्रिएशन को बढ़ावा देने के लिए तीन-पार्ट का फ्रेमवर्क बताया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, बिजनेस-फ्रेंडली गवर्नेंस रिफॉर्म्स और कैटेलिटिक फाइनेंस तक पहुंच पर आधारित है। उन्होंने बताया कि पहला स्तंभ भौतिक और मानव संसाधन ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें सड़क, ऊर्जा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। दूसरा स्तंभ उन सुधारों पर जोर देता है, जो छोटे से बड़े सभी व्यवसायों को संचालित करने और विस्तार करने में मदद करते हैं। तीसरा स्तंभ निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ब्लेंडेड कैपिटल और बीमा तंत्र जैसे वित्तीय साधनों पर ध्यान देता है।

इसके साथ ही, उन्होंने रोजगार सृजन के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की: इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, मूल्य-वर्धित विनिर्माण और पर्यटन। बंगा ने भारत के डेयरी कोऑपरेटिव मॉडल को एक सफल उदाहरण बताया कि कैसे तकनीक और संगठन गांव की रोजी-रोटी को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं भारत में पला-बढ़ा हूं। डेयरी सेक्टर जैसे कोऑपरेटिव स्ट्रक्चर ने छोटे प्रोड्यूसर को बेहतर मार्केट और प्राइसिंग तक पहुंचने में मदद की। उन्होंने चेतावनी दी कि रोजगार के काफी मौके न बनाने के दूरगामी नतीजे हो सकते हैं, जिसमें माइग्रेशन का बढ़ता दबाव और सामाजिक अस्थिरता शामिल है। उन्होंने नौकरियों की कमी को बड़ी ग्लोबल चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि सोचिए, अगर 800 मिलियन लोगों को उम्मीद और इज्जत नहीं मिल पाती है तो क्या असर होगा।

बंगा ने इस बात पर जोर दिया कि विकास की रणनीति को हर देश के हालात के हिसाब से बनाया जाना चाहिए, खासकर कमजोर या लड़ाई-झगड़े वाले देशों के हिसाब से। हालांकि, उन्होंने कहा कि पूरा फ्रेमवर्क एक जैसा रहता है। सरकारें बिजनेस के लिए अच्छा माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं, साथ ही जरूरी रेगुलेटरी सुरक्षा उपाय भी बनाए रखती हैं। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक अपना फोकस प्रोजेक्ट नंबर और फाइनेंसिंग वॉल्यूम जैसे इनपुट से हटाकर ऐसे नतीजों पर कर रहा है जिन्हें मापा जा सके। बंगा ने कहा कि मैं इनपुट से नतीजों की ओर जाने की कोशिश कर रहा हूं, जो नौकरियां और ग्रोथ हैं। उन्होंने विकास की कोशिशों में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि नतीजे दिखने वाले और मापने लायक होने चाहिए।

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