नेशनल डेस्क: हिमाचल प्रदेश सहित देशभर में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ी चिंता सामने आई है। हाल ही में की गई जांच में कुल 141 दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिनमें से 46 सैंपल अकेले हिमाचल प्रदेश में बनी दवाओं के हैं। ये दवाएं निमोनिया, अल्सर, मधुमेह, किडनी, बुखार, संक्रमण और अन्य बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती हैं।
किन जिलों में सबसे ज्यादा मामले
राज्य के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों से ये सैंपल लिए गए थे। जांच में सोलन जिले की 23 दवाएं, सिरमौर और ऊना जिले की 11-11 दवाएं, कांगड़ा जिले की 1 दवा मानकों पर खरी नहीं उतरी।
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किन बीमारियों की दवाएं फेल हुईं
कई गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं फेल हुई हैं, जिनमें निमोनिया, डायबिटीज, किडनी रोग, अल्सर, संक्रमण (फंगल, बैक्टीरियल), बुखार, खांसी, उल्टी, बीपी, एलर्जी, एसिडिटी, पेट के रोग शामिल हैं। ये सैंपल केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य की प्रयोगशालाओं द्वारा लिए गए थे। जांच में पाया गया कि कई दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
जिन कंपनियों की दवाएं फेल पाई गई हैं, उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है। साथ ही उन दवाओं को बाजार से वापस मंगवाने के आदेश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है किस भी मामलों की दोबारा जांच की जाएगी। दोषी कंपनियों के खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
दवाओं की गुणवत्ता खराब होने से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर मधुमेह, किडनी और संक्रमण जैसी बीमारियों में गलत या घटिया दवा खतरनाक साबित हो सकती है। सरकार और संबंधित विभाग अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त निगरानी और कार्रवाई की तैयारी में हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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