
सोनीपत। गोहाना अनाज मंडी में रविवार देररात आई आंधी और बारिश ने किसानों के पीले सोने को भिगो दिया। इस कारण किसान और व्यापारी गहरी चिंता में हैं। सुबह होते ही मजदूर भीगे कट्टों को दूसरे स्थान पर ले जाते दिखाई दिए।
हालत इतने खराब हैं कि मंडी में सूखी जगह लगभग खत्म हो चुकी है और हर तरफ पानी भरा नजर आ रहा है। बारिश के साथ मंडी की खराब व्यवस्था ने परेशानी और बढ़ा दी। सीवर जाम होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो सकी और पूरे परिसर में जलभराव हो गया। गेहूं के कट्टों के नीचे से पानी बहता रहा और तेज हवा में तिरपाल उड़ गए, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ गया। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि हर साल यही समस्या दोहराई जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता। मंडी में अब तक एक लाख 61 हजार 452 मेट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, जबकि करीब 70 हजार मेट्रिक टन उठान हुआ है।
फिलहाल मंडी में बीस लाख से अधिक बैग पड़े हैं और जगह की कमी के कारण नया अनाज रखना मुश्किल हो गया है। उठान की रफ्तार धीमी होने से स्थिति और गंभीर बन गई है। आढ़तियों का कहना है कि सीवर व्यवस्था पूरी तरह जाम है और पानी की निकासी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। भीगने के बाद जब अनाज एजेंसियों को भेजा जाएगा तो अधिक नमी के कारण उसे लौटाया जा सकता है। ऐसे में अनाज को दोबारा सुखाने पर अतिरिक्त खर्च होगा, जिससे व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ेगी। लिफ्टिंग कार्य कर रहे ठेकेदार पर भी सवाल उठ रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार टेंडर में जितने वाहन दिखाए जाते हैं, उतने मौके पर उपलब्ध नहीं होते। कम वाहनों से काम चलाने के कारण उठान प्रभावित है।
मंडी में बरदानों की कमी भी बताई जा रही है, जिससे पैकिंग और सुरक्षित भंडारण प्रभावित हो रहा है। कुछ दिन पहले अधिकारियों ने मंडी का दौरा कर सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नजर नहीं आया। किसानों और व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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सोनीपत: गोहाना की मंडी में खुले आसमान के नीचे भीगा हुआ गेहूं
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