नेशनल डेस्क: PM Modi सोमवार को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने सोमनाथ अमृत महोत्सव में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। यह आयोजन सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया जा रहा है। साल 1951 में मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद यहां प्राण प्रतिष्ठा हुई थी और उसी ऐतिहासिक अवसर की याद में इस वर्ष कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
गुजरात पहुंचते ही पीएम मोदी ने किया रोड शो
प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात पहुंचने के बाद रोड शो में हिस्सा लिया। इससे पहले उन्होंने देश के पहले उपप्रधानमंत्री Sardar Vallabhbhai Patel को श्रद्धांजलि अर्पित की। बाद में सोमनाथ मंदिर परिसर में उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। मंदिर में पीएम मोदी ने पूजा-अर्चना की और कुंभाभिषेक अनुष्ठान में भाग लिया। इस दौरान 11 पवित्र नदियों के जल से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया गया।
कहां स्थित है सोमनाथ मंदिर?
सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल बंदरगाह के पास स्थित है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है। सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार, यह मंदिर कपिला, हिरण और सरस्वती नदियों के संगम के निकट बना हुआ है। माना जाता है कि मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है और इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है।
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मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं
मान्यता है कि सबसे पहले चंद्र देव यानी सोमराज ने यहां सोने का मंदिर बनवाया था। इसके बाद रावण ने चांदी से, भगवान कृष्ण ने लकड़ी से और बाद में राजा भीमदेव ने पत्थरों से मंदिर का निर्माण कराया। समय के साथ मंदिर अपनी समृद्धि और प्रसिद्धि के कारण कई आक्रमणों का निशाना बना। इतिहासकारों के अनुसार, 1026 में महमूद गजनवी के हमले से पहले भी मंदिर कई बार बन और टूट चुका था।
इतिहास में कई बार टूटा और फिर बना सोमनाथ
इतिहास के अनुसार, सोमनाथ मंदिर पर अलग-अलग काल में कई हमले हुए।
महमूद गजनवी का हमला
1026 ईस्वी में आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। कहा जाता है कि उसने मंदिर की संपत्ति लूटी और बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। इसके बाद गुजरात के राजा भीमदेव और मालवा के राजा भोज ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।
दिल्ली सल्तनत और मुगल काल में हमले
1299 में अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल के दौरान मंदिर को फिर नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद भी कई बार मंदिर पर हमले हुए और हिंदू राजाओं ने समय-समय पर इसका पुनर्निर्माण कराया। मुगल बादशाह औरंगजेब के समय भी मंदिर को भारी क्षति पहुंचाई गई। बताया जाता है कि 1665 से 1706 के बीच मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था कभी कम नहीं हुई।
अहिल्याबाई होलकर ने कराया पुनर्निर्माण
18वीं सदी में अहिल्याबाई होलकर ने सोमनाथ सहित कई प्राचीन मंदिरों के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पुराने ध्वस्त मंदिर से कुछ दूरी पर नया मंदिर बनवाया ताकि धार्मिक गतिविधियां जारी रह सकें।
आजादी के बाद शुरू हुआ आधुनिक पुनर्निर्माण
भारत की आजादी के बाद 13 नवंबर 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। मंदिर निर्माण के लिए प्रसिद्ध वास्तुकार प्रभाशंकर सोमपुरा को जिम्मेदारी दी गई और नागर शैली में मंदिर तैयार किया गया। इस कार्य में K. M. Munshi की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। महात्मा गांधी से सलाह लेने पर उन्होंने कहा था कि मंदिर निर्माण का खर्च सरकार नहीं बल्कि जनता उठाए।
नेहरू और सोमनाथ पुनर्निर्माण विवाद
उस समय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मंदिर पुनर्निर्माण को सरकारी कार्यक्रम से जोड़ने पर आपत्ति जताई थी। उनका मानना था कि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार को धार्मिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इस कार्यक्रम में शामिल होने का फैसला किया। 11 मई 1951 को उन्होंने पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया।
1995 में पूरा हुआ पुनर्निर्माण
सोमनाथ ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर का आधुनिक पुनर्निर्माण 1 दिसंबर 1995 को पूरी तरह संपन्न हुआ। उस समय राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने मंदिर को राष्ट्र को समर्पित किया। वर्तमान में सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और इसके पहले अध्यक्ष सरदार पटेल थे।
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2021 में भी पीएम मोदी ने किया था उद्घाटन
साल 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का वर्चुअल उद्घाटन किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि आस्था को आतंक और हिंसा से दबाया नहीं जा सकता। सोमनाथ मंदिर आज केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुनर्निर्माण की शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है।
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