Last Updated: September 20, 2026

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‘गोट इंडिया टूर’ विवाद में बढ़ीं अरूप बिस्वास की मुश्किलें, पूछताछ के लिए थाने पहुंचे

June 18, 2026

‘गोट इंडिया टूर’ विवाद में बढ़ीं अरूप बिस्वास की मुश्किलें, पूछताछ के लिए थाने पहुंचे

कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीडांगन में दिसंबर 2025 में आयोजित लियोनेल मेसी के “गोट इंडिया टूर” के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर जांच एक बार फिर तेज हो गई है। इस मामले को लेकर राज्य के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास गुरुवार को बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे। जहां उनसे पूछताछ की जाएगी।

इससे पहले पूर्व खेल मंत्री बिस्वास बुधवार को भी बिधाननगर साउथ पुलिस स्टेशन पहुंचे थे, जहां उनसे पूछताछ की गई। यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई है जो मेसी की टीम की ओर से पुलिस को ईमेल के माध्यम से भेजी गई थी।

मेसी की टीम के एक सदस्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त त्रिपुरारी अथर्व को भेजे गए ईमेल में आरोप लगाया है कि स्टेडियम में अफरा-तफरी तब शुरू हुई, जब तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास मैदान में पहुंचे। आरोप में कहा गया है कि बिस्वास बार-बार मेसी के पास जाकर उनके कंधे और कमर को छूते हुए तस्वीरें खिंचवाने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही कई अनधिकृत लोग भी मैदान में प्रवेश कर गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

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शिकायत में यह भी कहा गया है कि आयोजन स्थल पर केवल तीन फोटोग्राफरों को अनुमति दी गई थी, लेकिन उस समय लगभग 40 लोग मैदान में मौजूद थे। इससे न केवल भीड़ बढ़ी, बल्कि मेसी भी असहज हो गए और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई, जिसके बाद उन्हें कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा।

आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मेसी की टीम द्वारा दिए गए नए विवरण जांच में मददगार साबित होंगे। इसी घटना के बाद दत्ता को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने भी पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था फैलाने के आरोप लगाए हैं।

आयोजनकर्ता सतद्रु दत्ता ने दावा किया है कि कार्यक्रम के लिए कुल 70 हजार टिकट छापे गए थे, जिनमें से लगभग 22 हजार टिकट तत्कालीन खेल मंत्री ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ले लिए थे। आरोप है कि इन टिकटों को आगे परिचितों में बांटा गया और कुछ की बिक्री भी की गई, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई।

इस मामले में पुलिस ने कई बार अरूप बिस्वास को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अब तक जांच में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि अदालत से मिली अंतरिम राहत के बाद वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। अदालत ने पहले उन्हें कुछ शर्तों के साथ गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था और पुलिस को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे।

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