श्रीनगरः डल झील और उसके आस-पास के इलाकों से बेमिना की राख-ए-अर्थ कॉलोनी में शिफ्ट किए गए कई परिवारों ने पुनर्वास प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस की विधायक शमीमा फिरदौस और निगीन लेक कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन (NLCO) के संस्थापक मंज़ूर वांगनू पर असली हकदारों को उनके सही घर और जमीन से वंचित करने का आरोप लगाया है।
विरोध कर रहे परिवारों का कहना है कि शिफ्ट होने से पहले वे डल झील के किनारे अपने-अपने घरों में अलग-अलग रहते थे, लेकिन राख-ए-अर्थ कॉलोनी में उन्हें एक ही घर दिया गया जिसे दो अलग-अलग परिवारों को शेयर करना पड़ रहा है।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि डल झील के निवासियों के लिए तय जमीन और घर हड़प लिए गए, जिससे कई असली हकदार बिना सही पुनर्वास के रह गए, जबकि सरकार ने उन्हें अलग-अलग घर देने का वादा किया था।
विरोध करने वालों में से एक, घाट नंबर 1, फोरशोर रोड के रहने वाले मुबारक अहमद रथ ने आरोप लगाया कि गरीब परिवारों के साथ नाइंसाफी करके पुनर्वास प्रक्रिया में हेरफेर की गई।
उन्होंने कहा कि हम डल झील पर अलग-अलग रहते थे, लेकिन हमें राख-ए-अर्थ में शिफ्ट करने के बाद दो अलग-अलग परिवारों को एक ही घर शेयर करने के लिए मजबूर किया गया। हम जानना चाहते हैं कि हमारे लिए तय घर और ज़मीन कहाँ गए।
रथ ने पूरी पुनर्वास प्रक्रिया की उच्च-स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की और आरोप लगाया कि डल झील के गरीब निवासियों के साथ धोखा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक घोटाला है और इसकी जाँच होनी चाहिए। डल झील के निवासियों के लिए तय जमीन हड़प ली गई है, जबकि असली हकदारों को मझधार में छोड़ दिया गया है।
विरोध करने वालों ने जम्मू-कश्मीर एंटी-करप्शन ब्यूरो से अपील की कि वे आवंटन प्रक्रिया की जांच करने, कथित गड़बड़ियों का पता लगाने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति बनाएं।
📍 Location: Srinagar (Srinagar)
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