लाइफस्टाइल डेस्क : वजन कम करते समय अपनी डाइट को कंट्रोल करना आसान नहीं होता। खासकर तब, जब खाना खाने के बाद अचानक मीठा खाने का मन करने लगे। कई लोगों को लंच या डिनर के बाद मिठाई, चॉकलेट या कोई दूसरी मीठी चीज खाने की इच्छा होने लगती है। ऐसे में लोग अक्सर सोचते हैं कि उनमें कंट्रोल की कमी है। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। शरीर में होने वाले कुछ बदलावों की वजह से भी मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है।
कैलोरी कम करने से बदल सकते हैं भूख के संकेत
जब कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए कम खाना या कम कैलोरी लेना शुरू करता है, तो शरीर में कुछ बदलाव होने लगते हैं। इसका असर भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन पर भी पड़ सकता है। घ्रेलिन एक ऐसा हार्मोन है, जो हमें भूख का एहसास कराता है। जब शरीर को पहले से कम कैलोरी मिलती है, तो इसकी वजह से भूख ज्यादा लग सकती है और बार-बार कुछ खाने का मन हो सकता है। वहीं, लेप्टिन शरीर में जमा फैट से बनने वाला हार्मोन है। यह दिमाग को बताता है कि शरीर को पर्याप्त एनर्जी मिल रही है या नहीं। जैसे-जैसे वजन और शरीर की चर्बी कम होती है, लेप्टिन का स्तर भी कम हो सकता है। इससे भूख बढ़ सकती है और वजन कम करना थोड़ा मुश्किल लग सकता है।
शरीर ऊर्जा बचाने की कोशिश करता है
जब हम वजन कम करने के लिए कम खाना शुरू करते हैं, तो शरीर को पहले से कम एनर्जी मिलती है। ऐसे में शरीर अपनी एनर्जी बचाने की कोशिश करता है। इसी वजह से ज्यादा भूख लग सकती है और बार-बार कुछ खाने का मन कर सकता है। इस दौरान मीठी चीजें खाने की इच्छा भी बढ़ सकती है, क्योंकि उनसे शरीर को जल्दी एनर्जी मिलती है। हालांकि, हर बार मीठा खाने का मन होना इस बात का संकेत नहीं है कि शरीर में एनर्जी की बहुत ज्यादा कमी है।
बहुत सख्त डाइट भी बढ़ा सकती है क्रेविंग
अगर वजन कम करने के लिए आप खाना छोड़ देते हैं या बहुत देर तक भूखे रहते हैं, तो बाद में बहुत ज्यादा भूख लग सकती है। इससे मीठा या दूसरी चीजें खाने की क्रेविंग भी बढ़ सकती है।
इसके अलावा, अगर खाने में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर नहीं है, तो पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस नहीं होता। इसलिए वजन कम करते समय सिर्फ कम खाना जरूरी नहीं है, बल्कि ऐसा खाना भी जरूरी है जिससे शरीर को सही पोषण मिल सके।
तनाव और नींद की कमी से भी बढ़ सकती है क्रेविंग
मीठा खाने का मन सिर्फ भूख की वजह से नहीं होता। अगर आप तनाव में हैं, ठीक से नींद नहीं ले रहे हैं या बहुत थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो भी मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है। मीठी चीजें खाने से थोड़ी देर के लिए अच्छा और संतुष्ट महसूस हो सकता है, इसलिए तनाव के समय कुछ लोगों को मीठा ज्यादा खाने का मन करता है।
इसके अलावा, अगर आप अपनी पसंद की किसी चीज को पूरी तरह से खाना बंद कर देते हैं, तो उसे खाने की इच्छा और बढ़ सकती है। इसलिए वजन कम करते समय बहुत ज्यादा सख्त डाइट लेने के बजाय संतुलित तरीके से खाना बेहतर होता है।
ब्लड शुगर को लेकर एक जरूरी बात
कभी-कभी लोग मीठा खाने की इच्छा को सीधे लो ब्लड शुगर से जोड़ देते हैं। हालांकि, सिर्फ मीठे की क्रेविंग होने का मतलब यह नहीं है कि ब्लड शुगर कम है। इसके पीछे भोजन का पैटर्न, लंबे समय तक भूखे रहना, तनाव या अन्य कारण भी हो सकते हैं।
क्रेविंग कम करने के लिए क्या करें?
– भोजन में पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल करें।
– लंबे समय तक खाना न छोड़ें और नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन करें।
– कैलोरी की कटौती बहुत ज्यादा करने से बचें।
– पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
– रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
– तनाव को नियंत्रित करने के लिए अपनी दिनचर्या में आराम और रिलैक्सेशन के तरीके शामिल करें।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
कभी-कभी मीठा खाने का मन करना सामान्य बात है। सिर्फ मीठा खाने की क्रेविंग होने से यह नहीं कहा जा सकता कि किसी व्यक्ति को डायबिटीज या हार्मोन से जुड़ी कोई बीमारी है। लेकिन अगर लगातार मीठा खाने का मन करता है और साथ में बहुत ज्यादा प्यास लगती है, बार-बार पेशाब आता है या हर समय थकान महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ब्लड शुगर या कुछ दूसरी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।