
Faridkot DC Reviews Anti-Drug Drive in Drug Hotspots : फरीदकोट। पंजाब सरकार के ‘नशे के खिलाफ जंग’ अभियान के तहत उपायुक्त राहुल चाबा ने जिले के नशा प्रभावित क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने संबंधित विभागों को जागरूकता अभियान तेज करने, स्थानीय निवासियों से निरंतर संपर्क बनाए रखने और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें खेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल से काम करने तथा नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज और पुनर्वास के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। पंजाब सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘नशे के खिलाफ जंग’ अभियान के अंतर्गत, फरीदकोट के सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप सिंगला के निर्देशों का पालन करते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. विश्वदीप गोयल के नेतृत्व में जिले के विभिन्न गांवों और शहरी क्षेत्रों में नशा-विरोधी जागरूकता कार्यक्रम चलाए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाना, युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करना और नशा-मुक्त समाज बनाने में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना था। इस अभियान के तहत पंजग्रेन कलां, पिपली गांव और अराइयांवाला कलां गांव में नशा-विरोधी जागरूकता शिविर लगाए गए।
इसके अलावा फरीदकोट शहर के दशमेश नगर इलाके और नशीले पदार्थों की समस्या से बुरी तरह प्रभावित अन्य क्षेत्रों में भी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों के दौरान, स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने लोगों को बताया कि नशीले पदार्थों की लत का स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और सामाजिक रिश्तों पर कितना बुरा असर पड़ता है। बाजाखाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Community Health Centre) ने पिपली गांव में “नशीले पदार्थों के सेवन के सामाजिक प्रभाव” विषय पर एक सामूहिक चर्चा सत्र आयोजित किया। इस सत्र में नशीले पदार्थों के सेवन के कारण परिवारों में पैदा होने वाली विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई।
आर्थिक नुकसान, सामाजिक रिश्तों का बिगड़ना और युवाओं के भविष्य पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव। लोगों को समझाया गया कि नशीले पदार्थों की समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए, नशीले पदार्थों के सेवन को रोकने के लिए परिवारों, समाज और स्वास्थ्य विभाग का मिलकर प्रयास करना बहुत जरूरी है। इसी पहल के तहत, पंजग्रेन कलां की ढाका बस्ती और अराइयांवाला कलां गांव में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन सत्रों के दौरान, प्रतिभागियों को सिखाया गया कि नशीले पदार्थों की लत के शुरुआती संकेतों को कैसे पहचानें, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को कैसे रोकें, और जो लोग नशीले पदार्थों की लत से जूझ रहे हैं, उन्हें सही इलाज लेने के लिए कैसे प्रोत्साहित करें।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि वे अपने आस-पास नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता फैलाएं और युवाओं को खेल, शिक्षा और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। फरीदकोट शहर के दशमेश नगर इलाके में नशा-विरोधी जागरूकता शिविर भी आयोजित किया गया। इस पहल में बलबीर बस्ती स्थित UPHC (शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) और फरीदकोट की बाजीगर बस्ती से जुड़े OOAT (आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट) केंद्रों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर लोगों को नशा छोड़ने के लिए उपलब्ध इलाज की सुविधाओं और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए जाने वाले सहयोग के बारे में जानकारी दी गई।
यह बताया गया कि नशीले पदार्थों की लत एक ऐसी स्थिति है जिसे सही इलाज और विशेषज्ञों की सलाह से प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए, नशे की लत से जूझ रहे लोगों को हतोत्साहित करने या उनके साथ भेदभाव करने के बजाय, उन्हें इलाज लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, ‘ड्रग हॉटस्पॉट’ (जहाँ नशे की समस्या अधिक है) के रूप में पहचाने गए इलाकों में विशेष जागरूकता अभियान चलाए गए, ताकि नशा रोकने का संदेश हर घर तक पहुंच सके। इन पहलों के जरिए लोगों से कहा गया कि वे नशीले पदार्थों की आपूर्ति और सेवन को लेकर सतर्क रहें, युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को समझें और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग से मदद लें।
मेष: दिन शुभ रहेगा...