कभी-कभी ऐसा होता है कि जिंदगी के सबसे सच्चे रिश्ते शब्दों से नहीं, अहसासों से लिखे जाते हैं। और हमारा पालतू कुत्ता उसी अहसास का सबसे खूबसूरत नाम होता है। वह सिर्फ घर की रखवाली ही नहीं करता, बल्कि मालिक की सुख-दुख, अकेलेपन और हर पल का साथी होता है।
चाल हो जाती है धीमी, बुझती हैं आंखें
उसकी वफादारी वक्त के साथ कम नहीं होती, बल्कि उम्र ढलने के साथ और गहरी हो जाती है। लेकिन जब उसकी जिंदगी अपनी अंतिम दहलीज पर पहुंचती है, तब वह बिना कुछ कहे अपने व्यवहार से ऐसे संकेत देने लगता है, जिन्हें महसूस कर दिल अंदर तक भर आता है। उसकी धीमी पड़ती चाल, बुझती आंखें और बढ़ती खामोशी मानो यह कहती हैं कि अब वह अपने सबसे प्यारे इंसान से आखिरी विदाई की तैयारी कर रहा है।
छोड़ देता है पसंदीदा भोजन
मौत के कुछ महीने या दिन पहले सबसे पहला और बड़ा बदलाव कुत्ते की भूख में देखने को मिलता है। वह अपना भोजन और पैडीग्री देखकर पूंछ हिलाने लगता था। वह खाने की तरफ देखता तक नहीं। आप उसका सबसे अजीज खाना उसके सामने रख दें तो भी वह उदासीन रहता है। उसका ऊर्जा का स्तर एकदम गिर जाता है। दौड़ना-कूदना तो दूर, रोजाना की वॉक पर जाने से भी कतराने लगता है। उसकी दुनिया घर के एक छोटे से हिस्से तक सीमित हो जाती है। वह बुलाने या आवाज देने पर भी वैसी प्रतिक्रिया नहीं देता। अंतिम क्षण पास आते हैं, कुत्ते का शरीर जवाब देने लगता है। आमतौर पर कुत्ते अपनी जीभ बाहर निकालकर जोर-जोर से हांफते हैं, लेकिन आखिरी वक्त में उनकी सांसें बेहद धीमी, भारी और अनियमित हो जाती हैं।
लड़खड़ाकर चला है और गिरता है
मांसपेशियों की ताकत पूरी तरह खत्म होने के कारण वे चलते-चलते लड़खड़ा कर गिर जाते हैं। सबसे दर्दनाक बदलाव तब देखने को मिलता है जब उनके शरीर का तापमान गिरने लगता है। अगर आप उनके कान या पंजों को छुएंगे, तो वे बिल्कुल ठंडे महसूस होंगे। इस चरण में वे अपने शारीरिक अंगों पर से नियंत्रण खो देते हैं, जिसके चलते वे बिना उठे ही, लेटे-लेटे अनजाने में मल-मूत्र का त्याग करने लगते हैं। यह वह वक्त होता है जब मालिक को अपने इस दोस्त की हालत देखकर सबसे ज्यादा तरस आता है। मरने से पहले हर कुत्ते का व्यवहार एक जैसा नहीं होता; वे मुख्य रूप से दो तरह की प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं। कुछ कुत्ते पूरी तरह से सामाजिक दूरी बना लेते हैं। वे घर का कोई ऐसा शांत, सुनसान या अंधेरा कोना (जैसे बेड या सीढ़ियों के नीचे) चुन लेते हैं जहां कोई उन्हें परेशान न करे।
ढुंढता है भावनात्मक सुरक्षा
वे अकेले ही इस दुनिया से जाना पसंद करते हैं। इसके विपरीत, कुछ कुत्ते इस मुश्किल घड़ी में भावनात्मक सुरक्षा ढूंढते हैं। वे अपने मालिक से एक पल के लिए भी दूर नहीं होना चाहते। मालिक घर में जहां-जहां जाएगा, वे अपनी आखरी ताकत बटोरकर उनके पीछे-पीछे घिसटेंगे। वे बार-बार मालिक का इंसानी स्पर्श चाहते हैं, क्योंकि आपका सहलाना और गले लगाना उन्हें इस अंतिम सफर के दर्द को सहने की हिम्मत देता है। एक समझदार मालिक होने के नाते, इस संवेदनशील समय में अपने वफादार साथी को भरपूर प्यार, धैर्य और गरिमापूर्ण विदाई देना ही हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।
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