Last Updated: September 23, 2026

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खांसी की दवा से 11 बच्चों की मौत, इन दो राज्यों में मचा हड़कंप

October 3, 2025

खांसी की दवा से 11 बच्चों की मौत, इन दो राज्यों में मचा हड़कंप

नेशनल डेस्क: मध्य प्रदेश और राजस्थान में नकली कफ सिरप के सेवन से अब तक 11 बच्चों की जान जा चुकी है। इस खतरनाक घटना ने दोनों राज्यों में हड़कंप मचा दिया है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 9 बच्चों की मौत हुई है, जबकि राजस्थान के भरतपुर और सीकर में 2 बच्चों की जान चली गई।

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राजस्थान में बच्चों की मौत का मामला

राजस्थान के भरतपुर जिले में 2 साल के एक बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्चा खांसी का इलाज कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गया था, जहां डॉक्टर ने उसे कफ सिरप दी। घर वापस आकर जैसे ही बच्चे को यह दवा दी गई, वह सो गया। कई घंटों तक होश में नहीं आने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 4 दिन बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिवार ने इस मामले की जांच की मांग की है और कहा है कि कफ सिरप के कारण ही उनकी जान चली गई। सीकर में भी एक 5 साल के बच्चे की मौत हुई है, जो कफ सिरप पीने के बाद बेहोश हो गया था। उसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मध्य प्रदेश में कफ सिरप से मौतें

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में भी कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत की संभावना जताई जा रही है। यहां अब तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी है। इन बच्चों को किडनी फेल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कलेक्टर ने इस कफ सिरप को बैन कर दिया है। प्रशासन ने जानकारी दी कि इस कफ सिरप के सेवन से बच्चों के किडनी में इन्फेक्शन हुआ था।

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सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मिल रही है यह दवा

भरतपुर और बयाना में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह कफ सिरप मुफ्त में बांटी जा रही थी। इसके अलावा बांसवाड़ा में भी कई बच्चों की तबियत बिगड़ गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सिरप की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं।

प्रशासन का एहतियात बरतने का आदेश

मध्य प्रदेश में प्रशासन ने बच्चों के इलाज के लिए एहतियात बरतने का आदेश दिया है। छिंदवाड़ा में 1420 बच्चों का इलाज चल रहा है, जो सर्दी और बुखार से प्रभावित हैं। अधिकारियों ने बताया कि यदि दो दिन से अधिक कोई बच्चा बीमार रहता है, तो उसे सिविल हॉस्पिटल में भेजा जाएगा और वहां उसे 6 घंटे तक मॉनिटर किया जाएगा। इसके अलावा प्राइवेट डॉक्टरों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे वायरल बुखार के मरीजों का इलाज न करें और उन्हें सरकारी अस्पताल भेजें।

नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग

इन घटनाओं के बाद अब दोनों राज्यों के लोग और डॉक्टर भी नकली दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि इस तरह की दवाओं की जांच हो और दोषियों को सजा मिले।

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