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Bihar Encounter: बिहार पुलिस-STF और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, कुख्यात इनामी नक्सली रमेश टुडू ढेर

April 9, 2025

Bihar Encounter: बिहार पुलिस-STF और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, कुख्यात इनामी नक्सली रमेश टुडू ढेर

Bihar Encounter: बिहार के बांका जिले के कटोरिया थाना क्षेत्र के क्लोथर जंगल में पुलिस और एसटीएफ द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान में मंगलवार की देर रात मुठभेड़ में बिहार-झारखंड का कुख्यात नक्सली रमेश टुडू मारा गया।

एक लाख रुपये का इनामी यह कट्टर नक्सली कटोरिया के बूढ़ीघाट गांव का निवासी था और पिछले 15 वर्षों से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। उसके खिलाफ जमुई और देवघर जिले के विभिन्न थानों में हत्या, अपहरण, डकैती और आर्म्स एक्ट समेत 11 गंभीर मामले दर्ज थे।

कुख्यात नक्सली रमेश टुडू ढेर, 11 संगीन मामले थे दर्ज

रमेश टुडू का लंबा आपराधिक इतिहास है। पहला मामला 30 नवंबर 2011 को चंद्रमंडी पुलिस स्टेशन में हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था। इसके बाद 18 दिसंबर 2015 को हत्या और साजिश के आरोप, 21 सितंबर 2018 को हत्या के आरोप, 9 जनवरी 2019 को अपहरण के आरोप, 28 फरवरी 2019 को पुलिस पर हमला और 24 मई 2019 को विस्फोटक अधिनियम के तहत साजिश और मामले दर्ज किए गए।

6 मार्च 2016 को चक्कई थाने में हत्या, 27 फरवरी 2017 को जसीडीह थाने में हत्या व डकैती, 23 दिसंबर 2013 को अपहरण, 17 नवंबर 2014 को चोरी व यूएपीए एक्ट तथा 13 जनवरी 2021 को आर्म्स एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे।

अन्य नक्सली ठिकानों पर कार्रवाई

मुठभेड़ के बाद डीएम अंशुल कुमार ने रमेश के शव के पोस्टमार्टम के लिए कटोरिया बीडीओ विजय कुमार सौरभ को मजिस्ट्रेट नियुक्त किया। पुलिस और एसटीएफ ने इलाके में सर्च अभियान तेज कर दिया है और अन्य नक्सली ठिकानों पर कार्रवाई की है।

इस घटना से क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों की आशंका फिर बढ़ गई है। करीब 20 साल पहले 3 नवंबर 2005 को आनंदपुर ओपी प्रभारी भगवान सिंह की हत्या के बाद नक्सलियों ने जंगलों में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए आतंक फैलाया था। इस क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का इतिहास रहा है।

26 फरवरी 2011 को जयपुर थाना क्षेत्र के मांझीडीह में 12 घंटे चली मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे गए थे, जिसमें देवन टुडू को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से चोरी की गई राइफल, एसएलआर, पिस्तौल और 141 राउंड बरामद किए गए। दो साल पहले उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

20 फरवरी 2017 को सबजोनल कमांडर मंटू खैरा के मारे जाने के बाद इलाके में शांति लौट आई थी। कटोरिया, चांदन व आनंदपुर ओपी थाना क्षेत्र का बड़ा हिस्सा जंगल, पहाड़ व नदियों से घिरा है। घने जंगलों के कारण यह क्षेत्र नक्सलियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह रहा है।

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