नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और युद्धविराम से जुड़े बयानों पर चुप रहने को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी और उनकी सरकार ट्रंप के विवादित दावों पर कोई जवाब नहीं दे रही, क्योंकि उन्हें सिर्फ तारीफ पसंद है, टैरिफ जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस नहीं।
क्या है मामला?
जयराम रमेश ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम उनकी वजह से हुआ, और उन्होंने दोनों देशों पर टैरिफ का दबाव डालकर समझौता करवाया। ट्रंप ने अमेरिका, सऊदी अरब और कतर में 11 दिनों में 8 बार यह बयान दिया। रमेश ने सवाल उठाया कि जब ट्रंप भारत और पाकिस्तान को “एक ही नाव में” रख रहे हैं, तो भारत सरकार क्यों चुप है? उन्होंने कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से 10 गुना बड़ी है, फिर भी दोनों को एक जैसा कैसे माना जा सकता है? हमारे प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री क्यों कुछ नहीं बोल रहे?”
प्रधानमंत्री टैरिफ पर चुप, तारीफ सुनने में व्यस्त
जयराम रमेश का तंज कसते हुए कहा, “हमारे प्रधानमंत्री टैरिफ पर चुप हैं, तारीफ सुनने में व्यस्त हैं। ट्रंप के बार-बार किए गए दावों पर भी सरकार चुप है। जयराम रमेश ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का मुद्दा उठाया और कहा कि कांग्रेस पार्टी ने इस पर सर्वदलीय बैठक और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने 10 मई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद सत्र की मांग की। रमेश ने कहा कि यह सत्र राष्ट्रीय सुरक्षा, पीओके और पाकिस्तान में चीन की बढ़ती भूमिका जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए जरूरी है। लेकिन सरकार इस पर भी चुप है।
‘आपातकाल’ पर विशेष सत्र की योजना पर सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार 25-26 जून को आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के नाम पर विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा, “2014 से देश में अघोषित आपातकाल चल रहा है, और वे 50 साल पुराने मुद्दे पर सत्र बुलाना चाहते हैं ताकि आज की समस्याओं से ध्यान भटकाया जा सके।” उन्होंने कहा कि भाजपा का हमला कांग्रेस पार्टी पर है, आतंकवादियों पर नहीं। सवाल यह है कि दुश्मन कौन है, कांग्रेस या आतंकवादी? हम चाहते हैं कि, पीएम मोदी खुद सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करें। लोकसभा और राज्यसभा का विशेष सत्र बुलाकर आतंकवाद पर चर्चा हो। 1994 के सर्वसम्मत प्रस्ताव को फिर से दोहराया जाए जिसमें पीओके को भारत का अभिन्न हिस्सा माना गया था।
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