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लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग: लेह में युवाओं ने किया हिंसक प्रदर्शन, BJP दफ्तर में लगाई आग 

September 24, 2025

लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग: लेह में युवाओं ने किया हिंसक प्रदर्शन, BJP दफ्तर में लगाई आग 

लेह (लद्दाख): लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में बुधवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। यह प्रदर्शन बाद में हिंसक झड़पों में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यालय पर हमला किया और वहां आग लगा दी। इसके अलावा कुछ पुलिस वाहनों और सरकारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया।

क्या है मांग?

लद्दाख के लोग चाहते हैं कि उन्हें भारत के संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष अधिकार मिले (जैसे आदिवासी इलाकों को मिलते हैं)। लद्दाख को फिर से राज्य का दर्जा दिया जाए, जैसा अनुच्छेद 370 हटने से पहले जम्मू-कश्मीर को था।

प्रदर्शन के पीछे कौन?

सोनम वांगचुक, जो लद्दाख में एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं, इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। वे पिछले कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील कर रहे थे। लेकिन बुधवार को प्रदर्शन में जब युवाओं की भीड़ उमड़ी, तो हालात बिगड़ गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दुख जताया और युवाओं से हिंसा रोकने की अपील की। वांगचुक ने कहा, “लेह में जो हिंसा हुई, उससे मैं बहुत दुखी हूं। यह हमारे उद्देश्य को नुकसान पहुंचाता है। कृपया शांति बनाए रखें।”

राजनीतिक प्रतिक्रिया

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता तनवीर सादिक ने कहा कि केंद्र सरकार ने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर दोनों के साथ ठीक से व्यवहार नहीं किया। लेकिन उन्होंने हिंसा की निंदा भी की और संवाद की मांग की।

राज्य का दर्जा जनता का हक: उमर अब्दुल्ला

वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राज्य का दर्जा बहाल नहीं कर रही, क्योंकि उसे हाल के चुनावों में हार मिली है। उन्होंने कहा, “राज्य का दर्जा जनता का हक है, इसे चुनावी नतीजों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।”

छठी अनुसूची क्या है?

यह संविधान का हिस्सा है जिसमें जनजातीय क्षेत्रों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। अभी यह असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम जैसे राज्यों पर लागू होती है। लद्दाख के लोग भी चाहते हैं कि उन्हें ऐसे ही अधिकार दिए जाएं ताकि वे अपनी संस्कृति और जमीन की रक्षा कर सकें। बताते चलें कि, साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया थातब से ही लद्दाख में लगातार मांग उठ रही है किउन्हें फिर से राज्य का दर्जा मिले। उनकी संस्कृति और अधिकारों की रक्षा की जाए।

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