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भारतीय नौसेना को मिला अत्याधुनिक युद्धपोत ‘हिमगिरी’, ब्रह्मोस और बराक मिसाइलों से है लैस

July 31, 2025

भारतीय नौसेना को मिला अत्याधुनिक युद्धपोत ‘हिमगिरी’, ब्रह्मोस और बराक मिसाइलों से है लैस

नेशनल डेस्क: भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी मिली है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने भारतीय नौसेना को एक अत्याधुनिक युद्धपोत ‘हिमगिरी’ सौंपा है। यह युद्धपोत प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनने वाले तीन गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट्स में से पहला है।

‘हिमगिरी’ की खासियत?

हिमगिरी GRSE द्वारा बनाया गया 112वां युद्धपोत और कुल मिलाकर 801वीं नाव है। इसकी लंबाई 149 मीटर और वजन 6,670 टन है। यह GRSE के 65 साल के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और उन्नत युद्धपोत है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें और बराक-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें लगी हैं।

यह जहाज CODAG सिस्टम (डीजल और गैस टरबाइन का मिश्रण) से चलता है, जो इसे तेज और शक्तिशाली बनाता है। इसमें AESA रडार और एडवांस वॉरफेयर सिस्टम भी लगे हैं, जो हवा, पानी और जमीन से आने वाले खतरों का मुकाबला कर सकते हैं। जहाज में 225 जवानों के रहने की पूरी सुविधा है और हेलिकॉप्टर संचालन की व्यवस्था भी है।

कब और कैसे बना यह युद्धपोत?

‘हिमगिरी’ का जलावतरण 14 दिसंबर 2020 को हुआ था। अब यह सभी टेस्ट और ट्रायल के बाद नौसेना को सौंपा जा चुका है। इसे ईस्टर्न नेवल कमांड के रियर एडमिरल रवनीश सेठ ने नौसेना की ओर से स्वीकार किया।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम

‘हिमगिरी’ पूरी तरह से भारत में बना है और इसमें भारतीय MSMEs, स्टार्टअप्स और घरेलू तकनीशियनों का बड़ा योगदान रहा है। इससे न सिर्फ नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं बल्कि देश का रक्षा उद्योग भी मजबूत हुआ है।

कुल लागत और प्रभाव

प्रोजेक्ट 17ए की कुल लागत करीब ₹21,833 करोड़ है। इस परियोजना से देश की शिपबिल्डिंग क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।

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