नेशनल डेस्क: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस बैठक को “पाखंड और ध्यान भटकाने की कवायद” करार दिया और सरकार के ‘विकसित भारत@2047’ लक्ष्य पर सवाल उठाया।
सरकार ने सामाजिक सद्भाव को नष्ट किया
जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हो रही बैठक में जो “विकसित भारत” बनाने का दावा किया जा रहा है, वह सच्चाई से दूर है। उन्होंने तर्क दिया कि केंद्र सरकार की नीतियां और क्रियाएं उस “विकसित भारत” के सिद्धांतों को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सामाजिक सद्भाव को नष्ट किया है और संसद, न्यायपालिका, विश्वविद्यालयों, मीडिया और संवैधानिक प्राधिकरणों को कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि भारत के मूल्यों पर लगातार हमले हो रहे हैं और “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” खतरे में है।
Today the Governing Council of the NITI Aayog meets under the chairmanship of the PM. It will reportedly review progress on the so-called Viksit Bharat goal.
What sort of Viksit Bharat will it be if those in power themselves destroy the bonds of social harmony by their malicious…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 24, 2025
रमेश ने लिखा, “अगर सत्ता में बैठे लोग ही समाज के बंधनों को नष्ट कर दें, तो कैसा विकसित भारत होगा? अगर सत्ता में बैठे लोग संसद, न्यायपालिका, मीडिया, और संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट कर दें, तो क्या यह एक विकसित भारत हो सकता है?” उन्होंने आगे कहा, “कैसा विकसित भारत होगा, जब सामाजिक असमानताएं बढ़ती जाएंगी और धन कुछ हाथों में सिमटता जाएगा?” रमेश ने यह भी सवाल किया कि अगर भारत की विविधताओं का अपमान किया जाएगा और उन्हें मिटाया जाएगा, तो क्या यह ‘विकसित भारत’ की ओर एक कदम भी होगा?
नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में यह बैठक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों, केंद्रीय मंत्रियों और नीति आयोग के अधिकारियों की उपस्थिति में हुई। बैठक में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत’ के लिए ‘विकसित राज्य’ की दिशा में राज्यों से सहयोग प्राप्त करना था। इसमें राज्यों को अपने अद्वितीय भौगोलिक और जनसांख्यिकीय लाभों का उपयोग करते हुए विकास की योजनाएं तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस योजना में मानव विकास, आर्थिक विकास, स्थिरता, प्रौद्योगिकी और शासन सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया गया। बैठक में राज्यों को समयबद्ध लक्ष्य तय करने, निगरानी और मूल्यांकन प्रकोष्ठों के माध्यम से डेटा-संचालित प्रबंधन और परिणाम-आधारित सुधारों पर जोर देने के लिए भी प्रेरित किया गया। इसके साथ ही, सरकार ने राज्यों से सुझाव मांगे कि वे किस तरह से उद्यमिता बढ़ाने, कौशल विकास और स्थायी रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
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