
नई दिल्ली: देश के बीयर इंडस्ट्री को एल्युमिनियम कैन की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उद्योग और सरकार दोनों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने इस संकट को लेकर सरकार से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से बिना किसी रुकावट के कैन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) में अल्पकालिक राहत देने की मांग की है।
BAI के अनुसार, 500 मिलीलीटर के कैन की सालाना कमी लगभग 12-13 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच चुकी है, जो कि देश में कुल बीयर बिक्री का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। इस कमी के कारण सरकारी खजाने को करीब 1300 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

अप्रैल 2025 से शुरू हुआ बीआईएस प्रमाणन का नया नियम
सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से एल्युमिनियम कैन को बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) प्रमाणन के दायरे में लाकर इसके उत्पादन और आयात पर सख्त नियम लागू किए हैं। इस कदम का उद्देश्य गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, लेकिन इस नीति के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति दोनों पर प्रभाव पड़ा है। भारत के प्रमुख कैन निर्माता जैसे बॉल बेवरेज पैकेजिंग इंडिया और कैन-पैक इंडिया पहले से ही अपनी उत्पादन क्षमता की सीमा तक पहुंच चुके हैं और अगले 6-12 महीनों तक उत्पादन बढ़ाने में असमर्थ हैं।
विदेशी आयात में बाधाएं
बीआईएस प्रमाणन प्रक्रिया में लंबा समय लगना, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से कैन आयात को बाधित कर रहा है। बीयर उद्योग इस वजह से गंभीर आपूर्ति संकट का सामना कर रहा है। बीएआई ने सरकार से एक साल के लिए क्यूसीओ नियमों में छूट देने की अपील की है ताकि विदेशी कैन की आपूर्ति में रुकावट न आए और उद्योग का उत्पादन प्रभावित न हो।
सरकार ने दी थी 30 सितंबर 2025 तक की मोहलत
सरकार ने गैर-बीआईएस प्रमाणित कैन के आयात के लिए आपूर्तिकर्ताओं को 30 सितंबर 2025 तक की अतिरिक्त समय सीमा दी है। लेकिन बीएआई का मानना है कि यह समय सीमा समस्या का समाधान करने के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि जिन विदेशी सप्लायर्स ने बीआईएस प्रमाणन के लिए आवेदन कर दिया है, उन्हें आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक कैन आयात की अनुमति दी जाए।
उद्योग के लिए बड़े खतरे का संकेत
बीयर उद्योग की प्रमुख कंपनियां एबी इनबेव, कार्ल्सबर्ग और यूनाइटेड ब्रूअरीज जो भारत में बीयर बिक्री का 85 प्रतिशत हिस्सा संभालती हैं, इस समस्या से सीधे प्रभावित हैं। यूनाइटेड ब्रूअरीज के सीईओ ने हाल ही में इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया है, जो उद्योग में चिंता की गंभीरता को दर्शाता है।
इस संकट से न केवल बीयर उद्योग बल्कि सरकार के राजस्व संग्रह पर भी बड़ा प्रभाव पड़ेगा। अतः विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि सरकार से त्वरित और व्यावहारिक समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति बाधित न हो और आर्थिक नुकसान को टाला जा सके।