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सरकार का आंकड़ा, FY25 में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम ₹1.2 लाख करोड़ पार; 9% की वृद्धि

health insurance premium India FY25 growth 1.2 lakh crore

health insurance premium India FY25 growth 1.2 lakh crore

भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र (हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर) लगातार मजबूत हो रहा है। सरकार ने गुरुवार को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।

सरकार के मुताबिक, देश में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर करीब 9 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रहा है। इस ग्रोथ के पीछे लोगों में बढ़ती जागरूकता, हेल्थ फाइनेंसिंग की बेहतर पहुंच और मेडिकल खर्चों से बचाव की बढ़ती जरूरत प्रमुख कारण हैं।

बीमा क्षेत्र को और बेहतर बनाने के लिए भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के लिए सख्त समय सीमा तय की है।

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नए नियमों के अनुसार, बीमा कंपनियों को कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन रिक्वेस्ट को एक घंटे के भीतर मंजूरी देनी होगी, जबकि अंतिम मंजूरी तीन घंटे के अंदर पूरी करनी होगी।

सरकार का कहना है कि इन कदमों से क्लेम में देरी कम होगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं, जैसे पॉलिसीधारकों की बढ़ती उम्र, ज्यादा कवर राशि और बेहतर पॉलिसी फीचर्स।

रेगुलेटर के 2024 के दिशा-निर्देश यह भी सुनिश्चित करते हैं कि बीमा उत्पादों की कीमत जोखिम के आधार पर तय हो और समय-समय पर डेटा और ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर उनकी समीक्षा की जाए।

क्लेम सेटलमेंट के मामले में भी सेक्टर में सुधार देखने को मिला है। 2024-25 में क्लेम भुगतान अनुपात 87.5 प्रतिशत रहा, जो 2023-24 में 82.46 प्रतिशत और 2022-23 में 85.66 प्रतिशत था।

आईआरडीएआई के ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी 1,37,361 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से करीब 93 प्रतिशत का समाधान उसी वित्त वर्ष में कर दिया गया।

हालांकि, कुछ मामलों में क्लेम अब भी खारिज हो जाते हैं। इसके पीछे कुछ कारण होते हैं, जैसे बीमा कवर से ज्यादा खर्च, को-पेमेंट, सब-लिमिट, डिडक्टिबल, रूम रेंट लिमिट और गैर-चिकित्सीय खर्च।

रेगुलेटर ने पारदर्शिता बढ़ाने और क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य पॉलिसीधारकों का भरोसा बढ़ाना और देश में हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम को ज्यादा भरोसेमंद और प्रभावी बनाना है।

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