Mobile Recharge Price Hike: देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने एक बार फिर आम जनता के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। बता दें कि कई शहरों में पेट्रोल के दाम 107 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने की खबरों के बीच अब यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में मोबाइल रिचार्ज प्लान भी महंगे हो सकते हैं।
टेलीकॉम सेक्टर पर बढ़ता खर्च का बोझ
विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल के महंगे होने से टेलीकॉम कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है। दरअसल देशभर में हजारों मोबाइल टावर लगातार नेटवर्क को चालू रखने के लिए काम करते हैं। इनमें से कई टावरों को चलाने के लिए खासकर गांव और दूर के इलाकों में बिजली और डीजल जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक मोबाइल टावर के कुल ऑपरेशनल खर्च का लगभग 40% हिस्सा बिजली और ईंधन पर खर्च होता है। ऐसे में जब डीज़ल महंगा होता है, तो नेटवर्क को बनाए रखने की लागत भी तेजी से बढ़ जाती है।
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5G विस्तार से बढ़ी चुनौती
देश में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार भी कंपनियों की लागत बढ़ा रहा है। 5G टावर पुराने नेटवर्क की तुलना में अधिक बिजली की खपत करते हैं और उन्हें लगातार हाई पावर सपोर्ट की आवश्यकता होती है। इससे कंपनियों का कुल खर्च और बढ़ने की संभावना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में डीज़ल पर निर्भरता
शहरी क्षेत्रों में जहां बिजली की बेहतर सुविधा है, वहीं कई ग्रामीण इलाकों में अभी भी टावर डीज़ल जनरेटर पर निर्भर हैं। यही कारण है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का सीधा असर इन टावरों के संचालन पर पड़ता है।
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टैरिफ बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत और वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण टेलीकॉम कंपनियां जल्द ही अपने टैरिफ में बदलाव कर सकती हैं। नेटवर्क उपकरण, बैटरी और हार्डवेयर की कीमतों में पहले से ही बढ़ोतरी देखी जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को कॉलिंग और डेटा प्लान के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
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