खेल डेस्क: अमोल मजूमदार की कहानी एक प्रेरणा है, जो बताती है कि संघर्ष और धैर्य के साथ किसी भी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। भले ही उन्होंने कभी भारतीय क्रिकेट टीम के लिए नहीं खेला, लेकिन कोचिंग में उन्होंने ऐसा कर दिखाया, जो बहुत से बड़े खिलाड़ी नहीं कर पाए। उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को 2025 महिला वनडे वर्ल्ड कप का चैंपियन बना दिया।
अमोल का क्रिकेट सफर 1988 में तब शुरू हुआ जब वे महज 13 साल के थे। वे अपने स्कूल क्रिकेट मैच के दौरान मैदान पर बल्लेबाजी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उस दिन सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली की जोड़ी ने 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की और अमोल को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। यह घटना उनके जीवन का प्रतीक बन गई, क्योंकि उन्हें हमेशा मौका दूर से ही दिखता था।

1993 में जब उन्होंने बॉम्बे (अब मुंबई) के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया, तो उनकी पहली पारी में ही उन्होंने 260 रन बनाए, जो किसी भी खिलाड़ी के द्वारा डेब्यू पारी में बनाए गए सबसे बड़े रन थे। इस शानदार पारी के बाद उन्हें ‘अगला सचिन तेंदुलकर’ कहा गया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। लंबे करियर के बाद भी वे भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बन सके, जबकि उन्होंने 11,000 से अधिक रन बनाए और 30 शतक लगाए।
2002 तक आते-आते अमोल ने हार मान ली थी, क्योंकि उन्हें बार-बार चयनकर्ताओं ने नजरअंदाज किया। लेकिन उनके पिता अनिल मजूमदार ने उन्हें हिम्मत दी और कहा, “खेल छोड़ना नहीं, तेरे अंदर अभी क्रिकेट बाकी है।” इसके बाद उन्होंने क्रिकेट में वापसी की और 2006 में मुंबई को रणजी ट्रॉफी जिताई। इसी दौरान उन्होंने रोहित शर्मा जैसे युवा खिलाड़ी को भी प्रथम श्रेणी क्रिकेट में मौका दिया।

2014 में क्रिकेट से अलविदा लेने के बाद, अमोल ने कोचिंग की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने नीदरलैंड्स, दक्षिण अफ्रीका और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों के साथ काम किया। उनकी कोचिंग शैली गहरी समझ और विचारशीलता पर आधारित थी, और उन्होंने अपनी टीमों को शानदार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। 2023 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के रूप में उनका चयन हुआ, जिससे कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि जो खिलाड़ी भारत के लिए कभी नहीं खेला, वह कोच कैसे बन सकता है? लेकिन कुछ ही समय बाद, उनकी सफलता ने इन आलोचनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
2025 महिला वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का प्रदर्शन पहले कुछ मैचों में खराब रहा। इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का दौर चल पड़ा। लेकिन अमोल ने टीम के सामने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी और उन्हें प्रेरित किया। हरमनप्रीत कौर ने बाद में कहा, “अमोल सर जो भी कहते हैं, दिल से कहते हैं और उनकी बातों में गहरी भावना होती है।”

सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को सिर्फ एक रन ज्यादा चाहिए था, और अमोल ने ड्रेसिंग रूम में बस इतना लिखा था, “हमें फाइनल में पहुंचने के लिए बस उनसे एक रन ज्यादा चाहिए, बस इतना।” इस साधारण वाक्य ने टीम की सोच बदल दी। जेमिमा रॉड्रिग्स ने 127 रन की नाबाद पारी खेली और भारत ने 339 रन का लक्ष्य हासिल कर ऑस्ट्रेलिया को हराया। यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी चेज़ थी। लेकिन अमोल मजूमदार ने इस जीत का जश्न नहीं मनाया, क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ एक अधूरी कहानी का अंत था। वह कहानी जो एक खिलाड़ी ने भारत के लिए कभी नहीं खेलकर, एक कोच के रूप में भारतीय टीम को चैंपियन बना दिया।

बताते चलें कि, अमोल मजूमदार की कहानी यह साबित करती है कि जीवन में किसी भी स्थिति में हार मानने की बजाय संघर्ष करते रहना चाहिए। उन्होंने खुद भारतीय टीम के लिए क्रिकेट नहीं खेला, लेकिन कोच के रूप में उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और 2025 महिला वनडे विश्व कप में भारत को चैंपियन बनाया। यह उनकी कड़ी मेहनत, संघर्ष और निष्ठा का परिणाम है।
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