एंटरटेनमेंट डेस्क: बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री और मशहूर गायिका सुलक्षणा पंडित अब हमारे बीच नहीं रही हैं। उनका 71 साल की उम्र में गुरुवार की रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, सुलक्षणा पंडित लंबे समय से बीमार चल रही थीं और उन्होंने मुंबई के नानावटी अस्पताल में रात करीब आठ बजे अंतिम सांस ली।

उनके भाई और मशहूर संगीतकार ललित पंडित ने उनके निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सुलक्षणना को अचानक हार्ट अटैक आया था। उनके निधन की खबर से पूरे फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बॉलीवुड से जुड़े कई कलाकारों और गायकों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और दुख व्यक्त किया। सुलक्षणा का अंतिम संस्कार शुक्रवार को मुंबई में किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: Today’s Weather: यूपी-बिहार में छाएगा घना कोहरा, इन राज्यों में आंधी के साथ ‘तेज बारिश’ का अलर्ट
संगीत और अभिनय
सुलक्षणा पंडित का जन्म 1954 में एक संगीत परिवार में हुआ था। वह महान शास्त्रीय गायक पंडित जसराज की भतीजी थीं। उनके तीन भाई और तीन बहनें हैं। उनके भाई जतिन-ललित की जोड़ी ने बॉलीवुड में मशहूर संगीतकार के रूप में पहचान बनाई। सुलक्षणा ने केवल 9 साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था। वह शुरू में स्टेज शो किया करती थीं। फिल्मों में उनका सिंगिंग करियर 1967 में आई फिल्म ‘तकदीर’ से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने लता मंगेशकर के साथ मशहूर गीत ‘सात समंदर पार से’ गाया था।

फिल्मों में भी छोड़ी खास छाप
सुलक्षणा पंडित को गायन के साथ-साथ अभिनय का भी शौक था। उन्होंने 1975 में फिल्म ‘उलझन’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘संकोच’, ‘अपनापन’, ‘हेरा फेरी’, ‘संघर्ष’, ‘अमर शक्ति’ जैसी फिल्में शामिल हैं। साल 1976 में फिल्म ‘संकल्प’ के गीत ‘तू सागर है, मैं किनारा’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वह 1970 और 80 के दशक की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक रहीं।
मशहूर गायकों के साथ किया काम
सुलक्षणा ने अपने करियर में उस दौर के लगभग सभी बड़े गायकों जैसे किशोर कुमार, मोहम्मद रफ़ी, येशुदास और उदित नारायण के साथ युगल गीत गाए। उन्होंने ‘हेरा फेरी’, ‘शंकर शंभू’, ‘कसम खून की’, ‘खानदान’, ‘धरमकांटा’, ‘वक्त की दीवार’ और ‘काला सूरज’ जैसी फिल्मों में अपनी आवाज दी। उनकी आखिरी फिल्म बतौर अभिनेत्री ‘दो वक्त की रोटी’ (1988) थी। इसके बाद वह फिल्मों से दूर होती चली गईं।
अधूरी प्रेम कहानी
सुलक्षणा पंडित की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। कहा जाता है कि वह अभिनेता संजीव कुमार से बेहद प्यार करती थीं और उनसे शादी करना चाहती थीं, लेकिन संजीव कुमार ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया। इस घटना के बाद सुलक्षणा बेहद टूट गईं और आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया। उन्होंने अपनी बाकी जिंदगी अकेलेपन में गुजारी।
उनकी आवाज आखिरी बार 1996 में फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ के गीत ‘सागर किनारे भी दो दिल’ में सुनाई दी थी, जिसे उनके भाइयों जतिन-ललित ने संगीतबद्ध किया था। सुलक्षणा पंडित को हमेशा एक ऐसी कलाकार के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने अपने सुरों की मिठास और अभिनय की सादगी से हिंदी सिनेमा को एक अलग पहचान दी।