कुछ साल पहले तक भारतीय सरकारी दफ्तरों में एक सूक्त वाक्य लिखा मिलता था, आराम हराम है। यह कथन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का है। शायद स्वाधीन भारत के लिए अहर्निश मेहनत और काम की जरूरत थी, ताकि सैकड़ों साल की गुलामी से उबरे भारत को आर्थिक रूप से पटरी पर लाया जा सके। भारत ने जब 1991 में अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार शुरू किया और उदारीकरण के पथ पर चल पड़ा, तब नेहरू के इस कथन को जैसे आत्मसात कर लिया गया। अंग्रेजी का एक शब्द है, अल्कोहलिक। मर्यादा से ज्यादा पीने वाले लोगों के लिए अंग्रेजी में यह शब्द प्रयोग में लाया जाता है। कुछ इसी अंदाज में भारत में वर्कोहलिक शब्द चल पड़ा। वर्कोहलिक यानी जो ज्यादा काम कर सके। शायद उदारीकरण में आर्थिक तेजी लाने के लिए ज्यादा श्रम और काम की जरूरत थी। ऐसे में भारत के विशेषकर निजी क्षेत्र में छुट्टियां लेना एक तरह से कुशल श्रम का उल्लंघन माना जाने लगा। इस संदर्भ में जरा चीन की छुट्टियों को देखिए। यहां होने वाली राष्ट्रीय छुट्टियों ने लगातार काम करने और उसके जरिए आर्थिक गतिविधियों की तेजी की अवधारणा को एक तरह से बदल कर रख दिया है।
चीन में इस साल एक अक्टूबर से आठ अक्टूबर तक राष्ट्रीय अवकाश रहा। इस अवकाश के दिनों में लोग अपने गांवों-पुश्तैनी घरों की यात्रा करते हैं या फिर घूमने-फिरने जाते हैं। इसके साथ ही लोग भारी संख्या में विदेश जाते हैं और विदेशी लोग भी चीन की यात्रा करते हैं। विदेश से चीन आने वाले लोगों में चीनी मूल के लोग भी होते हैं,जो राष्ट्रीय छुट्टी के दौरान अपने घर और पुश्तैनी गांवों-कस्बों तक पहुंचते हैं। इस दौरान चीन में कितने लोग विदेश से आए और कितने विदेश गए, इसका आंकड़ा चीन के राष्ट्रीय आव्रजन प्रशासन ने जारी किया है। इन आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 की इन छुट्टियों के दौरान करीब 1 करोड़ 63 लाख 43 हजार चीनी और विदेशी नागरिक या तो चीन आए या फिर चीन से बाहर गए। इस लिहाज से देखें तो यह आंकड़ा रोजाना करीब बीस लाख 43 हजार लोगों का होता है। यानी इतने लोग रोजाना या तो चीन आए या फिर चीन से गए। पिछले साल इसी अवधि के दौरान इससे करीब 11.5 प्रतिशत लोग आए या फिर गए। जाहिर है कि चीन आने-जाने वाले लोगों की संख्या में इतनी संख्या की पिछले साल की तुलना में बढ़त है। इन आंकड़ों के अनुसार, 4 अक्टूबर को सबसे ज्यादा यानी करीब 23 लाख 53 हजार लोग या तो चीन आए या फिर चीन से विदेश गए। इनमें करीब 14 लाख 34 हजार विदेशी नागरिक रहे। जिन्होंने चीन की यात्रा की। यह संख्या पिछले साल की इन्हीं छुट्टियों के दौरान चीन आने वाले विदेशियों की तुलना में करीब 21.6 ज्यादा रही है। दिलचस्प यह है कि इस दौरान हांगकांग, मकाऊ और ताइवान से मुख्य चीनी भूमि में आने वाले लोगों का आंकड़ा करीब 57 लाख 44 हजार रहा। राष्ट्रीय छुट्टियों के दौरान देश में काफी चहल-पहल रही। रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों के साथ ही रेलवे स्टेशनों पर काफी यात्री नजर आए। इस दौरान लोगों ने जहाज, ट्रेन और अन्य वाहनों को मिलाकर कुल 7 लाख 44 हजार परिवहन साधनों का इस्तेमाल किया गया। जो पिछले साल की इसी अवधि के दौरान इस्तेमाल वाहनों की संख्या से करीब 11 प्रतिशत ज्यादा है।
चीन में प्रतिवर्ष होने वाले एक से 8 अक्टूबर के सार्वजनिक अवकाश को”गोल्डन वीक” भी कहा जाता है। इस दौरान चीन में बढ़े घरेलू यात्रियों और बाहरी पर्यटकों की वजह से राजस्व में बढ़त देखी गई। हालांकि आंकड़ों के अनुसार, बीते मई में हुए सार्वजनिक अवकाश के दौरान दर्ज वृद्धि से कम रहा। लेकिन चीन के मशहूर पॉशपैकर हॉस्टल्स चेंग्दू ग्रुप के संस्थापक मिक्स शी का कहना है कि ”गोल्डन वीक ‘गोल्डन वीक’ रहा। गुरुवार यानी 9 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 से 8 अक्टूबर के दौरान कुल घरेलू पर्यटन यात्राएँ 88.8 करोड़ तक रहीं, जिनसे करीब 809.01 अरब युआन यानी करीब $113.63 अरब डॉलर का राजस्व हासिल हुआ। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में इस साल यात्रियों के लिहाज से करीब 1.8 प्रतिशत और राजस्व के लिहाज से करीब 7.6 प्रतिशत अधिक है। ये आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि छुट्टियां भी जिंदगी में जरूरी होती हैं और आर्थिक गतिविधियों की तेजी के लिए भी।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

