इंटरनेशनल डेस्क। चीन ने हाल ही में अपने देश में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों पर भारी टैक्स लगाकर लोगों को बिना इनका इस्तेमाल किए यौन संबंध बनाने के लिए प्रेरित करना शुरू किया है। इसका मकसद चीन में जन्मदर को बढ़ाना है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश चीन अब कम प्रजनन दर की समस्या से जूझ रहा है। चीन में प्रति महिला औसतन सिर्फ 1 बच्चा हो रहा है। सरकार चाहती है कि यह संख्या बढ़कर 2 हो जाए। इसके लिए चीन ने कंडोम और गर्भनिरोधकों जैसे उत्पादों पर 13% वैट (मूल्य वर्धित कर) लागू कर दिया है।
इसके बजाय, बच्चों की देखभाल (चाइल्ड केयर) और विवाह से जुड़ी सेवाओं पर कोई टैक्स नहीं लगाया गया है। इसका मतलब है कि सरकार परिवार बनाने और बच्चों की परवरिश को बढ़ावा देना चाहती है।
जन्म देने वाले परिवारों को मिलेगा इनाम
चीन ने पिछले साल अपने राष्ट्रीय चाइल्ड केयर प्रोग्राम के लिए 90 अरब युआन (लगभग 12.7 अरब डॉलर) का बजट रखा था। इसके तहत तीन साल या उससे कम उम्र के हर बच्चे के लिए परिवारों को लगभग 3,600 युआन (500 डॉलर या 41,000 रुपये) दिए जाएंगे। इस तरह की सुविधाओं से सरकार चाहती है कि लोग ज्यादा बच्चे पैदा करें और परिवारों को प्रोत्साहित करें।
चीन में कंडोम और गोलियों की नई कीमत
नए टैक्स के बाद चीन में एक पैकेट कंडोम की कीमत लगभग 50 युआन (7 डॉलर या 630 रुपये) हो गई है। एक महीने की गर्भनिरोधक गोलियों की औसत कीमत लगभग 130 युआन (19 डॉलर या 1,150 रुपये) है। इस महंगी कीमत के कारण लोग इनका इस्तेमाल कम करेंगे और जन्मदर बढ़ सकती है।
चीन में जन्मदर क्यों घट रही है?
चीन की एक-बच्चा नीति ने पिछले कई दशकों में जन्मदर को कम किया। 1960 में प्रति महिला औसत बच्चे की संख्या 7 से ज्यादा थी, लेकिन 2015 में यह गिरकर 1.5 तक आ गई। इसके बाद सरकार ने दो-बच्चा और फिर तीन-बच्चा नीति लागू की, ताकि जन्मदर बढ़ सके। हालांकि, बदलाव के बावजूद जन्मदर घटती रही। 2021 में 1.2 और 2024 में यह केवल 1.0 तक पहुंच गई।
जन्मदर घटने की वजह
चीन में सामाजिक बदलाव, आर्थिक दबाव और बड़े शहरों में जीवन की कठिनाइयों के कारण लोग कम बच्चे पैदा कर रहे हैं। इसलिए सरकार ने अब नीतियों और टैक्स के जरिए जन्मदर बढ़ाने की कोशिश शुरू की है।

