इंटरनेशनल डेस्क: नीदरलैंड की राजनीति में मंगलवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब प्रधानमंत्री डिक शूफ ने अप्रत्याशित रूप से अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। दक्षिणपंथी पार्टी “फॉर फ्रीडम” (PVV) द्वारा सत्तारूढ़ गठबंधन से समर्थन वापस लेने के बाद यह राजनीतिक संकट गहराया, जिसके चलते प्रधानमंत्री शूफ को यह कदम उठाना पड़ा।
प्रधानमंत्री शूफ ने हेग में कहा कि,
“मैं आज बाद में राजा विलेम-अलेक्जेंडर को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपूंगा। यह एक कठिन निर्णय है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यही सबसे उपयुक्त मार्ग है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में तब तक कार्यभार संभालते रहेंगे जब तक कि नई सरकार का गठन नहीं हो जाता।
डिक शूफ ने पीवीवी की इस अचानक वापसी की तीखी आलोचना करते हुए इसे “गैर-जिम्मेदाराना और पूरी तरह अनावश्यक” करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश कई जटिल चुनौतियों से जूझ रहा है जैसे आव्रजन, आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट गठबंधन से हटना देशहित के खिलाफ है।
-2024 में संभाला था पदभार
शूफ की सरकार ने 2 जुलाई, 2024 को पदभार संभाला था और मुश्किल से एक वर्ष के भीतर ही अस्थिरता का शिकार हो गई है। यह घटनाक्रम नीदरलैंड की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है और अब सबकी नजरें राजा की अगली कार्रवाई और संभावित मध्यावधि चुनावों पर टिक गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि आने वाले समय में यूरोपीय राजनीति में उथल-पुथल का संकेत भी हो सकता है।
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