
13 दिसंबर 1937 को चीन के च्यांगसू प्रांत के नानचिंग शहर में हुए नरसंहार में जापानी आक्रमणकारियों ने लाखों स्थानीय नागरिकों की जान बेरहमी से ले ली। यह जापानी सैन्यवाद की बर्बरता और मानवता के विरुद्ध अपराधों का प्रतीक है। स्थानीय समयानुसार 11 दिसंबर को, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।
मारिया ज़खारोवा ने अपील की कि नानचिंग नरसंहार की ऐतिहासिक सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता। सुदूर पूर्व के लिए अंतर्राष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण ने न्यायिक तरीकों से तथ्यों का पता लगाया और अपने फैसले में उनकी पुष्टि की। नूर्नबर्ग परीक्षण के साथ मिलकर, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और समकालीन अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली की मज़बूत नींव बना है। ऊपर दिए गए फैसले पर सवाल उठाने, नाज़ीवाद व सैन्यवाद को सही ठहराने, द्वितीय विश्व युद्ध के नतीजों को तोड़-मरोड़कर पेश करने या किए गए अपराधों के पैमाने को कम करके दिखाने की किसी भी कोशिश की पूरी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को निंदा करनी चाहिए।
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(साभार – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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