विश्व फासीवाद विरोधी युद्ध की विजय की 80वीं वर्षगांठ पर विश्व के विकास इतिहास पर नजर डालें तो यह पता चलता है कि चीन और भारत सहित एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई विकासशील देशों ने द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अपनी राष्ट्रीय मुक्ति और स्वतंत्रता हासिल की और तेजी से आर्थिक विकास के रास्ते पर आगे बढ़े। विश्व मामलों पर कुछ पश्चिमी शक्तियों के प्रभुत्व का इतिहास समाप्त हो गया, आज उभरती अर्थव्यवस्थाएं और क्लॉब साउस के देश विश्व अर्थव्यवस्था के विकास के मुख्य शक्ति बन गए हैं। यह वास्तव में सौ वर्ष परिवर्तनों का मूल कारण है और यही है फासीवाद-विरोधी युद्ध के विजय का सबसे अहम अर्थ है।
औपनिवेशिक युग की शुरुआत से ही पश्चिमी ताकतें दुनिया के भाग्य पर हावी रहीं। अफीम युद्ध के बाद चीन धीरे-धीरे एक अर्ध-सामंती और अर्ध-औपनिवेशिक देश में बदल गया था। 1900 में ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, रूस, जापान सहित ताकतों ने बीजिंग पर हमला किया। उस समय इन देशों का कुल आर्थिक उत्पादन विश्व के आधे से अधिक था। हालाँकि 100 से अधिक वर्षों के बाद, पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से गिर गई, जबकि ब्रिक्स देशों सहित नव उभरती अर्थव्यवस्थाओं का कुल आर्थिक उत्पादन पश्चिमी जी 7 के कुल से अधिक हो गया है। पश्चिम अब अपनी आर्थिक ताकत के बल पर विश्व मामलों पर हावी नहीं रह सकता। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सहयोग के बिना 2008 के वित्तीय संकट जैसी वैश्विक समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। यह तथाकथिक सौ वर्ष महान परिवर्तनों का मूल अर्थ है।
2024 में, चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी 13,445 अमेरिकी डॉलर तक पहुंची, जो विश्व बैंक द्वारा निर्धारित उच्च आय वाले देश के मानक (14,005 अमेरिकी डॉलर) के बहुत करीब है। चीन की वर्तमान विकास गति को देखते हुए, इस लक्ष्य को जा पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होगी। वर्तमान में, वैश्विक आर्थिक शासन प्रणाली का पुनर्गठन तीव्र गति से किया जा रहा है, पर कुछ पुराने विकसित देश अपनी आधिपत्यात्मक स्थिति के लिए चुनौती को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। अब जी-7 ग्रुप का अर्थ खो गया है, और जी-20, जो कि व्यापक श्रेणी के देशों का प्रतिनिधित्व करता है, ही विश्व समस्याओं के समाधान में मुख्य भूमिका निभा रहा है। नई सदी की शुरुआत से ही पश्चिमी विकसित देश कम आर्थिक विकास के दौर में चले गए हैं, जबकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने अपने विकास में तेजी ला दी है। सुधार और खुली नीति अपनाने के बाद से चीन की औसत आर्थिक वृद्धि दर 8% से अधिक हो गयी है। 2018 में, क्रय शक्ति समता के आधार पर चीन का आर्थिक आकार विश्व के कुल का 16.8% था। इसके साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गरीबी दर में गिरावट जारी है तथा जन जीवन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध की जीत के बाद, अधिकांश विकासशील देश साम्राज्यवादी और उपनिवेशवादी शासन की बेड़ियों से मुक्त हो गए और आधुनिकीकरण की ओर महान यात्रा शुरू की। संक्षेप में, सौ वर्ष महान परिवर्तन के पीछे वैश्विक आर्थिक विकास का तथ्य है। विश्व की सम्पत्ति पर कुछ देशों के एकाधिकार का इतिहास बहुत पुराना हो चुका है। विश्व के लिए जीत-जीत सहयोग ही एकमात्र रास्ता है। चीन का वर्तमान बाजार आकार संयुक्त राज्य अमेरिका से दोगुना है, जो उच्च तकनीक कंपनियों सहित अमेरिकी कंपनियों के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है। चीन द्वारा उत्पादित बड़ी संख्या में उच्च गुणवत्ता और कम लागत वाली वस्तुओं ने भी अमेरिकी लोगों के जीवन स्तर को बनाए रखने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। चीन का लक्ष्य इस सदी के मध्य तक मध्यम विकसित देश के स्तर तक पहुंचना है। एआई द्वारा प्रस्तुत चौथी औद्योगिक क्रांति इस प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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