इंटरनेशनल डेस्क: कभी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले अमेरिका की तस्वीर इन दिनों बदली हुई दिख रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि देश में पाकिस्तान जैसी आर्थिक तंगी देखने को मिल रही है। कई शहरों में आम लोग मुफ्त भोजन और राशन के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं। जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, वे अमेरिकी सपने की सच्चाई बयां कर रहे हैं।
अचानक क्यों बिगड़ी अमेरिका की हालत?
इस आर्थिक बदहाली की वजह है सरकारी “शटडाउन”, जो 1 अक्टूबर से लागू है। सरकारी शटडाउन का अर्थ है कि सरकार के पास अपने विभागों और योजनाओं के संचालन के लिए धन खत्म हो जाना। इस कारण लाखों सरकारी कर्मचारी या तो बिना वेतन के काम कर रहे हैं या फिर नौकरी से बाहर हैं। लगातार कई हफ्तों से वेतन न मिलने के कारण लोग अपने दैनिक खर्च तक पूरे नहीं कर पा रहे हैं, और अब हालात भोजन संकट तक पहुंच गए हैं।
एसएनएपी प्रोग्राम पर रोक बनी संकट की बड़ी वजह
अमेरिका में गरीब और जरूरतमंदों के लिए चलाए जाने वाले “सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (SNAP)” को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस प्रोग्राम के तहत करीब 4.2 करोड़ अमेरिकी नागरिकों को भोजन सहायता मिलती थी। जैसे ही यह योजना रुकी, देशभर में मुफ्त खाद्यान्न वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें लग गईं। यह दृश्य कुछ साल पहले के पाकिस्तान की याद दिलाते हैं, जब महंगाई और आर्थिक संकट के बीच लोग आटे और दाल के लिए सड़कों पर उतर आए थे।
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एनजीओ बने उम्मीद की किरण
हालात से निपटने के लिए अब अमेरिका के कई सामाजिक संगठन और एनजीओ आगे आए हैं। न्यूयॉर्क के ब्रॉन्क्स इलाके में ‘वर्ल्ड ऑफ लाइफ क्रिश्चियन फेलोशिप इंटरनेशनल पैंट्री’ में शनिवार को सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने लोग भोजन लेने पहुंचे। कई लोग तो सुबह चार बजे से ही लाइन में लग गए ताकि उन्हें फलों, ब्रेड, दूध और सब्जियों जैसी जरूरी चीजें मिल सकें।
पैंट्री में सेवा दे रही मैरी मार्टिन खुद भी वहां से खाद्य सहायता लेती हैं। उन्होंने कहा, “अगर यह फूड पैंट्री नहीं होती, तो हमें पता नहीं चलता कि परिवार का पेट कैसे भरते। मैं अपने पोते-पोतियों को भूखा नहीं देख सकती।”
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न्यायालय से मिली अस्थायी राहत
अमेरिकी कृषि विभाग ने शनिवार से खाद्य सहायता कार्यक्रम के भुगतान रोकने का आदेश दिया था, लेकिन दो संघीय न्यायाधीशों ने हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन को भुगतान जारी रखने का निर्देश दिया। हालांकि, अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि लोगों के खातों में पैसा कब पहुंचेगा। इस अनिश्चितता ने देशभर में भय और भ्रम का माहौल बना दिया है।
शटडाउन ने उजागर की आर्थिक कमजोरियाँ
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी समाज की आर्थिक असमानता को उजागर कर दिया है। “शटडाउन” के कारण कई परिवारों की बचत खत्म हो चुकी है और अब वे पूरी तरह सरकारी सहायता या दान पर निर्भर हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर अमेरिका की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
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