Last Updated: September 22, 2026

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जम्मू-कश्मीर: CBI की बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार के मामले में 2 वन अधिकारियों समेत 3 गिरफ्तार

June 14, 2026

जम्मू-कश्मीर: CBI की बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार के मामले में 2 वन अधिकारियों समेत 3 गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर डेस्क। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने रविवार को कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भ्रष्टाचार के आरोप में वन विभाग के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में वन विभाग के दो अधिकारी और उसी विभाग का एक कैजुअल लेबरर (अस्थायी कर्मचारी) शामिल है।

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गिरफ्तार लोगों की पहचान कावूसा, मगाम के रेंजर मंजूर अहमद मलिक; नुसगाम, खानसाहिब के फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार; और रामहामा, बीरवाह के कैजुअल लेबरर बशीर अहमद गनी के तौर पर हुई है। ये गिरफ्तारियां सीबीआई पुलिस स्टेशन, कश्मीर में ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के सिलसिले में की गईं।

इससे पहले, सीबीआई की एक टीम ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके में जाल बिछाया और बशीर अहमद गनी को तब पकड़ा जब वह कथित तौर पर 15,000 रुपये की रिश्वत ले रहा था। यह ऑपरेशन अवैध रूप से पैसे की मांग के आरोपों के बाद शुरू किया गया था। सूत्रों ने बताया कि आगे की जांच चल रही है। इस केंद्र शासित प्रदेश की अपनी भ्रष्टाचार-रोधी संस्था, ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) है, जिसे सरकारी अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच करने और उसे रोकने का अधिकार है।

सीबीआई के पास ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ के तहत भ्रष्टाचार की जांच करने का मुख्य अधिकार क्षेत्र है, जिसमें मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारी, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी शामिल होते हैं। सीबीआई के भ्रष्टाचार-रोधी अधिकार क्षेत्र के दायरे और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई खास ऑपरेशनल नियम हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के तहत केंद्रीय अधिकार क्षेत्र उन अधिकारियों पर लागू होता है जो केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी आम तौर पर राज्य के ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। चूंकि पुलिसिंग राज्य का विषय है, इसलिए सीबीआई राज्यों में ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम’ की धारा 6 के तहत संबंधित राज्य सरकारों द्वारा दी गई ‘सामान्य सहमति’ के माध्यम से काम करती है। कई राज्यों ने यह सामान्य सहमति वापस ले ली है, जिसका मतलब है कि सीबीआई को उन इलाकों में जांच करने के लिए मामले-विशेष की सहमति या अदालत के आदेश की जरूरत होती है।

सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट सीबीआई को देश में कहीं भी किसी भी भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने का अधिकार दे सकते हैं, भले ही राज्य सरकार सहमति देने से इनकार करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानीय राज्य पुलिस बल और एसीबी के पास भी अपने राज्य में काम कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत मामले दर्ज करने और उनकी जांच करने का अधिकार क्षेत्र है।

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