नेशनल डेस्क : देश के 52 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप नें न्यायामूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने शपथ ले ली है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायमूर्ति गवई को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने औपचारिक रूप से अपने कार्यभार की शुरुआत की। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का अभिवादन किया। उन्होंने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की जगह ली
बता दें कि न्यायमूर्ति भूषण गवई ने यह जिम्मेदारी न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद संभाली है। जस्टिस खन्ना एक दिन पहले ही रिटायर हुए थे।न्यायमूर्ति गवई की नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना 30 अप्रैल को भारत सरकार के कानून मंत्रालय ने जारी की थी। इससे पहले 16 अप्रैल को तत्कालीन सीजेआई संजीव खन्ना ने केंद्र सरकार को गवई के नाम की सिफारिश की थी।

कार्यकाल सिर्फ छह महीने का
जस्टिस गवई का कार्यकाल लगभग छह महीने का होगा। वह इस साल 23 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इतने कम समय के लिए किसी प्रधान न्यायाधीश का कार्यकाल होना असामान्य नहीं है, क्योंकि यह वरिष्ठता के आधार पर तय किया जाता है। न्यायमूर्ति भूषण गवई का सीजेआई बनना एक ऐतिहासिक क्षण है। अब उनकी जिम्मेदारी होगी कि वह भारत की न्यायपालिका का नेतृत्व निष्पक्ष और मजबूत तरीके से करें, भले ही यह कार्यकाल छोटा ही क्यों न हो।
#WATCH | Delhi: President Droupadi Murmu administers oath of office to Justice BR Gavai as the Chief Justice of India (CJI).
(Video Source: President of India/social media) pic.twitter.com/3J9xMbz3kw
— ANI (@ANI) May 14, 2025
जस्टिस गवई का न्यायिक सफर
आपको बता दें कि जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का जन्म 24 नवंबर, 1960 को अमरावती, महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत 16 मार्च, 1985 को की थी, जब वे बार में शामिल हुए। शुरुआत में वे महाराष्ट्र हाईकोर्ट के महाधिवक्ता (Advocate General) और वरिष्ठ वकील बैरिस्टर राजा भोंसले के साथ जुड़े रहे। इसके बाद उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से वकालत की। उसके बाद उन्होंने मुख्य रूप से संवैधानिक कानून और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों में, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में प्रैक्टिस की। वे 1992 में सहायक सरकारी वकील और फिर अतिरिक्त लोक अभियोजक बने। 2000 में, उन्हें सरकारी वकील और लोक अभियोजक नामित किया गया। उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और फिर 2005 में स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।
कार्यकाल और सेवानिवृत्ति
हालांकि, जस्टिस गवई का कार्यकाल बहुत लंबा नहीं होगा। वे लगभग 6 महीने तक देश के चीफ जस्टिस रहेंगे, क्योंकि वे नवंबर 2025 में 65 वर्ष की आयु पूरी कर रिटायर हो जाएंगे। हालांकि कार्यकाल छोटा है, लेकिन उनका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।
दलित समुदाय से आने वाले दूसरे चीफ जस्टिस
जस्टिस गवई का मुख्य न्यायाधीश बनना इसलिए भी खास है क्योंकि वे दलित समुदाय से आने वाले दूसरे CJI होंगे। उनसे पहले जस्टिस के.जी. बालकृष्णन को यह सम्मान मिला था, जो 2007 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने थे। इस तरह, गवई का चयन सामाजिक न्याय और विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।