नेशनल डेस्क: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई “ढाई साल का पावर शेयरिंग समझौता” नहीं हुआ है। बेलगावी में चल रहे कर्नाटक विधानसभा सत्र के आखिरी दिन उन्होंने विपक्ष के आरोपों और सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जब तक कांग्रेस हाई कमान कोई अलग फैसला नहीं लेती, तब तक वही मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
विपक्षी दल बीजेपी बार-बार उनके कार्यकाल को लेकर सवाल उठा रहा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री चुनने की एक तय प्रक्रिया होती है। पहले जनता चुनाव में आशीर्वाद देती है, फिर विधायक दल का नेता चुना जाता है और अंत में पार्टी हाई कमान फैसला करती है। उन्होंने कहा कि अभी वह मुख्यमंत्री हैं और जब तक हाई कमान कुछ और नहीं कहता, वह इस पद पर बने रहेंगे।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सवाल उठाया कि सिद्धारमैया को पांच साल के लिए चुना गया था, तो फिर “ढाई साल” की चर्चा कहां से आई? इस पर सिद्धारमैया ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी ढाई साल की बात नहीं की और ऐसा कोई समझौता है ही नहीं। मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि कांग्रेस सरकार अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेगी और 2028 में फिर से सत्ता में लौटेगी। उन्होंने कहा, “हम पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे। जब तक हाई कमान नहीं कहता, तब तक मैं ही मुख्यमंत्री हूं।”
पिछले कुछ दिनों से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि कांग्रेस हाई कमान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना सकती है। हालांकि बाद में इन अटकलों पर विराम तब लगा जब सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने एक-दूसरे के घर जाकर नाश्ता किया और साथ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी की एकता का संदेश दिया।
इससे पहले डीके शिवकुमार ने एक डिनर मीटिंग को लेकर चल रही चर्चाओं को भी खारिज किया था। उन्होंने कहा कि वह अपने पूर्व डीसीसी अध्यक्ष के सम्मान में डिनर पर गए थे, जिनका बेलगावी और कर्नाटक के लिए बड़ा योगदान रहा है। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि इस मुलाकात का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था।
वहीं, बीजेपी एमएलसी चालवड़ी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान की वजह से राज्य के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
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