Last Updated: September 21, 2026

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फैटी लिवर से लेकर डायबिटीज तक, जानें गिलोय के फायदे और सेवन का सही तरीका

August 7, 2026

फैटी लिवर से लेकर डायबिटीज तक, जानें गिलोय के फायदे और सेवन का सही तरीका

Benefits of Giloy : आयुर्वेद में गिलोय को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया है। यह बेल के रूप में उगने वाला पौधा है, जिसका इस्तेमाल सदियों से कई स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है। कोरोना काल के बाद गिलोय को लेकर लोगों की रुचि और बढ़ी और कई लोगों ने इसे अपने घरों में लगाना शुरू किया।

कैसी होती है गिलोय की पहचान?

गिलोय की पत्तियां आकार में पान के पत्तों जैसी होती हैं और इनका रंग गहरा हरा होता है। ये सामान्य पत्तों की तुलना में कुछ बड़ी दिखाई देती हैं। आयुर्वेद में इसे गुडूची और अमृता के नाम से भी जाना जाता है।मान्यता है कि जिस पेड़ के सहारे गिलोय की बेल बढ़ती है, उसके कुछ गुण भी इसमें आ जाते हैं। इसी वजह से नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय को विशेष औषधीय महत्व दिया जाता है, जिसे नीम गिलोय कहा जाता है।

गिलोय में मौजूद औषधीय गुण

आयुर्वेद के अनुसार गिलोय की पत्तियां, जड़ और तना सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। हालांकि, दवाओं में इसका तना ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को बेहतर बनाने और सूजन कम करने में मदद कर सकते हैं।

आयुर्वेद में गिलोय का इस्तेमाल बुखार, पेट की समस्याओं, गठिया, डायबिटीज, कब्ज, एसिडिटी से जुड़ी परेशानियों में सहायक के रूप में किया जाता है। इसे शरीर में वात, पित्त और कफ के संतुलन को बनाए रखने वाली जड़ी-बूटी भी माना जाता है।

गिलोय का सेवन किन रूपों में किया जाता है?

गिलोय का रस
गिलोय सत्व
गिलोय चूर्ण

डायबिटीज में गिलोय का इस्तेमाल

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय शरीर में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। माना जाता है कि यह इंसुलिन के बेहतर उपयोग में मदद कर सकती है। हालांकि डायबिटीज के मरीजों को गिलोय का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, खासकर यदि वे पहले से दवाएं ले रहे हों।

डेंगू और बुखार में गिलोय

आयुर्वेद में गिलोय को बुखार कम करने और शरीर की इम्यूनिटी (बीमारियों से लड़ने की ताकत) बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। कुछ लोग डेंगू में इसे मददगार मानकर लेते हैं, लेकिन गिलोय डेंगू का इलाज नहीं है। तेज बुखार या डेंगू के लक्षण होने पर डॉक्टर से इलाज करवाना जरूरी है।

पाचन और एनीमिया में गिलोय का उपयोग

गिलोय का काढ़ा और चूर्ण पेट की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। यह कब्ज, अपच और पेट से जुड़ी परेशानियों में राहत देने में मदद कर सकता है। कुछ लोग इसे कमजोरी दूर करने और शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं।

लिवर के लिए गिलोय के फायदे

आयुर्वेद में गिलोय सत्व को लिवर के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से बचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, फैटी लिवर या लिवर की किसी बीमारी से परेशान लोगों को गिलोय लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना गिलोय नहीं लेना चाहिए। इसके अलावा, जो लोग किसी गंभीर बीमारी से परेशान हैं या नियमित रूप से दवाइयां लेते हैं, उन्हें भी गिलोय का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

(Disclaimer: यह आर्टिकल केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी भी बीमारी के इलाज, दवा में बदलाव या गिलोय जैसे आयुर्वेदिक उपायों को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। दैनिक सवेरा टाइम्स किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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