Last Updated: November 3, 2026

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अब Urine Test से भी पता लगाया जा सकता है Brain Tumor

February 3, 2023

अब Urine Test से भी पता लगाया जा सकता है Brain Tumor

टाेक्योः वैज्ञानिकों ने मूत्र में एक प्रमुख झिल्ली प्रोटीन की पहचान करने के लिए एक नए उपकरण का इस्तेमाल किया है जिससे यह पता चलता है कि मरीज को मस्तिष्क का ट्यूमर है या नहीं। झिल्ली प्रोटीन ऐसे प्रोटीन होते हैं जिनसे या तो जैव झिल्लियाँ निर्मित होती हैं या जो इन जैव झिल्लियों से जुड़ने या आर-पार जाने में सक्षम होते हैं। अध्ययन के अनुसार, मस्तिष्क के कैंसर का पता लगाने में इस्तेमाल होने वाले प्रोटीन से ट्यूमर का पता लगाने के लिए आवश्यक आक्रामक जांच की आवश्यकता कम हो सकती है और ट्यूमर के शुरुआती स्तर पर ही पता चलने की संभावना बढ़ सकती है ताकि उसे सजर्री से हटाया जा सके।

अध्ययन में कहा गया है कि जापान के नगोया विश्वविद्यालय के इस अनुसंधान का अन्य प्रकार के कैंसर का पता लगाने के लिए संभावित असर हो सकता है। यह अध्ययन पत्रिका ‘एसीएस नैनो’ में प्रकाशित हुआ है। हाल फिलहाल में कई प्रकार के कैंसर का शुरुआती स्तर पर पता चलने से कैंसर पीड़ितों के बचने की संभावना बढ़ गयी है। हालांकि, ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित लोगों के जीवित बचने की दर में पिछले करीब 20 साल से कोई बदलाव नहीं आया है। इसकी मुख्य वजह संभावित रूप से देर से पता चलना हो सकती है।

अध्ययन के अनुसार, किसी व्यक्ति के ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित होने का संभावित संकेत उनके मूत्र में ट्यूमर से संबंधित बा‘ कोशिका (ईवी) की उपस्थिति है। इसमें कहा गया है कि ईवी सूक्ष्म आकार की कोशिका होती हैं जो कोशिका से कोशिका के बीच संचार समेत कई कार्यों में शामिल होती हैं। चूंकि ब्रेन कैंसर के मरीजों में पाए जाने वाले इन ईवी में विशेष प्रकार के आरएनए और झिल्ली प्रोटीन होते हैं तो इनका इस्तेमाल कैंसर का पता लगाने में किया जा सकता है।

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