
Chakrasana Benefits: योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपराओं का अहम हिस्सा है, जिसे शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने में मददगार माना जाता है। योग के अलग-अलग आसनों में चक्रासन का विशेष महत्व है। नियमित अभ्यास से यह आसन शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकता है।
चक्रासन नाम में ‘चक्र’ का मतलब पहिया और ‘आसन’ का अर्थ शरीर की विशेष मुद्रा होता है। इस आसन में शरीर को पीछे की ओर मोड़कर पहिए जैसा आकार बनाया जाता है। इसके अभ्यास से पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही पोश्चर और शरीर के लचीलेपन में भी सुधार हो सकता है।
ये भी पढे़ं :–https://dainiksaveratimes.com/lifestyle/zeptos-dark-store-raided-in-jaipur-1550-dairy-packets-destroyed/
आयुष मंत्रालय के अनुसार, चक्रासन का नियमित अभ्यास कमर और रीढ़ से जुड़ी कुछ परेशानियों में राहत देने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा यह कब्ज की समस्या में राहत, तनाव और चिंता को कम करने तथा मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकता है। पारंपरिक योग मान्यताओं में इसे आंखों के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
चक्रासन करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं। इसके बाद दोनों घुटनों को मोड़कर पैरों को कूल्हों के पास रखें। अब दोनों हाथों को सिर के पास लाकर हथेलियों को जमीन पर रखें और उंगलियों का रुख कंधों की ओर रखें। आसन करते समय शरीर की स्थिति सहज और संतुलित रखना जरूरी है।
इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेते हुए हथेलियों और पैरों पर दबाव डालें और शरीर को ऊपर उठाएं। शरीर को पीछे की ओर मोड़ते हुए पहिए जैसी मुद्रा बनाएं और सिर को आराम से पीछे की ओर रखें। इस स्थिति में करीब 10 से 20 सेकंड तक सामान्य रूप से सांस लेते हुए बने रहें। इसके बाद बिना जल्दबाजी किए सावधानीपूर्वक शरीर को वापस जमीन पर ले आएं।
चक्रासन का सही तरीके से नियमित अभ्यास शरीर को मजबूत और लचीला बनाने के साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। यह रीढ़ और मांसपेशियों की मजबूती तथा शरीर में सक्रियता बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, कमर या रीढ़ से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इसका अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। लंबे समय तक बैठने से शरीर में जकड़न महसूस होने पर भी विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इसे दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।