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ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन में बड़ा खुलासा, अत्यधिक गर्मी बढ़ा रही मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं

Heat and Mental Health

Heat and Mental Health

यूरोप, अमेरिका समेत दुनिया के अधिकतर महाद्वीप हीट वेव से जूझ रहे हैं। जनहानि की खबरें भी आ रही हैं। इस बीच ऑस्ट्रेलिया में की गई एक स्टडी ने युवाओं की मनःस्थिति पर पड़ने वाले असर को उजागर किया है। अध्ययन के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के कारण युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं।

द गार्जियन ऑस्ट्रेलिया में मंगलवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन की सह-लेखिका और सिडनी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल्स नेटवर्क की किशोर मनोचिकित्सक साइबेल डे ने कहा, “जलवायु परिवर्तन पहले से ही बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित कर रहा है।”

सिडनी विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में न्यू साउथ वेल्स राज्य में वर्ष 2001 से 2022 के बीच 24 वर्ष तक की आयु के लगभग 7.2 लाख अस्पताल भर्ती मामलों का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि जब तापमान रिकॉर्ड के शीर्ष 1 प्रतिशत स्तर तक पहुंच गया, तो गर्म महीनों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी अस्पताल भर्ती का जोखिम दोगुना हो गया, जबकि ठंडे महीनों में यह जोखिम तीन गुना तक बढ़ गया।

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यह अध्ययन ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री’ में प्रकाशित हुआ है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि यदि वैश्विक तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो इस सदी के अंत तक गर्मी से जुड़े मानसिक स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में 6 प्रतिशत से 7.7 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में दी गई है।

अध्ययन में केवल उन गंभीर मामलों को शामिल किया गया है, जिनमें अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पड़ी। इनमें अवसाद (डिप्रेशन), सिजोफ्रेनिया, नशीले पदार्थों का दुरुपयोग, खान-पान संबंधी विकार (ईटिंग डिसऑर्डर) और आत्म-हानि (सेल्फ-हार्म) जैसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मामले शामिल हैं। हालांकि, इसमें आपातकालीन विभाग (इमरजेंसी) और बाह्य रोगी (आउटपेशेंट) सेवाओं के मामलों को शामिल नहीं किया गया।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के बाद मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मामलों में तेजी से वृद्धि यह संकेत देती है कि इसके पीछे शरीर की जैविक (फिज़ियोलॉजिकल) प्रतिक्रिया हो सकती है। इसके संभावित कारणों में नींद में बाधा, तनाव, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बदलाव, आवेगपूर्ण व्यवहार में वृद्धि तथा शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में बढ़ोतरी शामिल हो सकते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, ये निष्कर्ष इस बात पर जोर देते हैं कि हीट-हेल्थ (गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य) योजनाओं और नीतियों में मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक जोखिमों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

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