मुंबई: Collective Studios ने फ़िल्ममेकर हंसल मेहता और प्रोड्यूसर साहिल सैगल द्वारा स्थापित True Story Films के साथ पार्टनरशिप करके ‘खाना दिल से’ भारत के किचन की AI के ज़रिए एक यात्रा की घोषणा की है। हाल ही में रिलीज़ हुए टीज़र में एक अनोखी एपिसोडिक सीरीज़ की पहली झलक दिखाई गई है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नज़रिए से भारत की पाक-कला की विरासत को दिखाती है।
मेहता के लिए, ‘खाना दिल से’ उस क्षेत्र में वापसी का प्रतीक है जहाँ उन्होंने सबसे पहले अपनी पहचान बनाई थी। 1990 के दशक की शुरुआत में, उन्होंने ‘खाना खज़ाना’ बनाया था यह एक ऐसा अग्रणी कुकरी शो था जिसने शेफ़ संजीव कपूर को घर-घर में मशहूर कर दिया और भारत के लोगों का स्क्रीन पर खाने के प्रति नज़रिया ही बदल दिया। तीन दशक बाद, मेहता एक बार फिर खाने की दुनिया में लौटे हैं, लेकिन इस बार उनके सहयोगी के तौर पर AI उनके साथ है।
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Instagram पर ‘खाना दिल से’ का टीज़र शेयर करते हुए हंसल मेहता ने कहा, “32 साल पहले, मैंने ‘खाना खज़ाना’ बनाया था। पूरे देश ने संजीव कपूर नाम के एक अद्भुत शेफ़ के साथ मिलकर खाना बनाना सीखा। और जैसा कि लोग कहते हैं बाकी सब इतिहास है! आज, मैं ‘खाना दिल से’ के साथ वापसी कर रहा हूँ जिसमें भारत के दिल से निकली रेसिपीज़ शामिल हैं। यह सिर्फ़ एक फ़ूड शो नहीं है।
यह भारत के घरों की एक यात्रा है सबसे पहले वहाँ की रेसिपीज़ के ज़रिए, और फिर उन रेसिपीज़ में छिपी यादों, परंपराओं और शांत कविताओं के ज़रिए। शेफ़ शमशेर अहमद के साथ मिलकर, हम आपके लिए अपनी कुछ सबसे पसंदीदा डिशेज़ लेकर आए हैं और साथ ही उन संस्कृतियों को भी, जिन्होंने इन डिशेज़ के स्वाद को आकार दिया है। और इस बार, मेरा एक नया क्रिएटिव पार्टनर भी है AI. यह भारत के किचन से रेसिपीज़ आप तक पहुँचाने में हमारी मदद कर रहा है, और साथ ही उन रेसिपीज़ के पीछे छिपी विविध संस्कृति की एक झलक भी दिखा रहा है।”

इस नई पहल में उनका साथ दे रहे हैं भारतीय मास्टर शेफ़ शमशेर अहमद, जो इस प्रोजेक्ट में विषय-विशेषज्ञ और पाक-कला सलाहकार के तौर पर शामिल हुए हैं। भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों में अहमद का दशकों का अनुभव इस सीरीज़ को और भी ज़्यादा प्रामाणिक और दमदार बनाएगा, क्योंकि यह सीरीज़ देश की विशाल और विविध खान-पान की परंपराओं को बारीकी से दिखाती है। असल में, ‘खाना दिल से’ भारत की रसोई के ज़रिए उसकी संस्कृति की एक खोज है; यह पीढ़ियों से चली आ रही रेसिपी के ज़रिए पलायन, यादों और पहचान की कहानियों को सामने लाती है।
इस सीरीज़ की सबसे खास बात है इसमें AI का इस्तेमाल सिर्फ़ एक विज़ुअल और कल्पना के टूल के तौर पर नहीं, बल्कि कहानी कहने की प्रक्रिया में एक सहयोगी के तौर पर भी। यह खाने की परंपराओं का पता लगाने, क्षेत्रीय प्रभावों को उजागर करने और अलग-अलग समुदायों और सदियों में खाने के सफ़र और बदलावों को समझने में मदद करता है। ‘खाना दिल से’ खाने को एक जीवित सांस्कृतिक विरासत के तौर पर फिर से स्थापित करती है।

इस शो के बारे में बात करते हुए हंसल मेहता ने कहा, “खाना यादें होती हैं। जब आप किसी दूसरी संस्कृति का खाना बनाते हैं, तो आप सिर्फ़ एक रेसिपी को फ़ॉलो नहीं कर रहे होते, बल्कि आप किसी और की ज़िंदगी के एक हिस्से में कदम रख रहे होते हैं। एक रेसिपी अपने अंदर पूरा इतिहास समेटे होती है ज़मीन का, पलायन का, और दादी के हाथों का।
ये शायद इंसानियत के सबसे मज़बूत सांस्कृतिक दस्तावेज़ हैं, जो पीढ़ियों-दर-पीढ़ियों और सीमाओं के पार पहुँचते हैं, और तब भी ज़िंदा रहते हैं जब बाकी सब कुछ मिट जाता है। यही बात खाने को लोगों को समझने और यह जानने का एक बहुत ही सच्चा ज़रिया बनाती है कि वे असल में कौन हैं। ‘खाना दिल से’ के ज़रिए, हम अपने पास मौजूद हर टूल जिसमें AI भी शामिल है का इस्तेमाल करके उन कहानियों को सामने लाना चाहते हैं, इससे पहले कि वे कहीं खो जाएँ।”
प्रोड्यूसर साहिल सहगल जो स्विट्ज़रलैंड के ‘लेस रोशेस’ से होटल मैनेजमेंट के एलुमनाई हैं और खुद भी एक रेस्टोरेंट मालिक हैं ने कहा, “‘खाना दिल से’ ने हमें यह सोचने का मौका दिया कि अगर AI खाने से जुड़े टीवी शो की प्रक्रिया का हिस्सा बन जाए, तो वे कैसे दिखेंगे? इसमें AI इंसानी कहानियों की जगह नहीं लेता, बल्कि हमें उन कहानियों की और भी गहराई तक पहुँचने में मदद करता है। पूरे भारत में खाने से जुड़ी ऐसी कई परंपराएँ हैं, जिन्हें कभी भी दस्तावेज़ों में दर्ज नहीं किया गया है। यह हमारा एक छोटा सा प्रयास है, ताकि हम उन परंपराओं को खोजकर दुनिया के सामने ला सकें।”

‘कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क’ के संस्थापक और ग्रुप CEO विजय सुब्रमण्यम ने कहा, “कलेक्टिव में, हमारा हमेशा से यह मानना रहा है कि कहानी कहने का तरीका हमारे पास मौजूद टूल्स के साथ-साथ विकसित होता रहता है। भारत की खाने से जुड़ी परंपराएँ दुनिया के सबसे समृद्ध सांस्कृतिक खज़ानों में से एक हैं, फिर भी इनमें से कई कहानियाँ आज भी दस्तावेज़ों में दर्ज नहीं हैं। ‘खाना दिल से’ क्रिएटर्स, फ़िल्ममेकर्स और टेक्नोलॉजी के जानकारों को एक साथ लाती है, ताकि उन कहानियों को ऐसे अनोखे और नए अंदाज़ में दुनिया के सामने लाया जा सके, जैसा पहले कभी नहीं किया गया।”
कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क के कलेक्टिव स्टूडियोज़ के सहयोग से ट्रू स्टोरी फिल्म्स द्वारा निर्मित, ‘खाना दिल से एन AI जर्नी थ्रू इंडियाज़ किचन’ अपनी तरह की पहली ऐसी सीरीज़ है, जो भारत की कहानी उसके भोजन के माध्यम से बताने के लिए पाक-कला की विरासत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक साथ लाती है।
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