Last Updated: September 21, 2026

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गर्मियों में दही खाना चाहिए या नहीं? आयुर्वेद में बताए गए नियम जानें

March 5, 2026

गर्मियों में दही खाना चाहिए या नहीं? आयुर्वेद में बताए गए नियम जानें

गर्मियों के मौसम के साथ ही आहार में ठंडे और तरल पेय पदार्थों की मांग बढ़ जाती है और इसके लिए सबसे अच्छा विकल्प है दही।

दही का इस्तेमाल कई तरीकों से गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए किया जाता है लेकिन क्या किसी भी समय दही का सेवन करना सही है। आयुर्वेद में दही को जहां अमृता माना गया है, वहीं उसके सेवन के सही नियम और मात्रा भी बताई गई है।

आयुर्वेद में दही को बलवर्धक और अग्नि प्रदीपक माना गया है। सरल भाषा में कहें तो दही पाचन अग्नि को तेज करती है और शरीर को बल भी देती है। चरक संहिता में दही के गुणों के बारें में भी विस्तार से बताया गया है। दही भारी, चिकनी, खट्टी और बल को बढ़ाने वाले होती है और इसके सेवन का असर हर किसी के शरीर पर अलग-अलग होता है। इसके साथ ही रात के समय दही के सेवन को हानिकारक माना गया है। यह स्पष्ट करता है कि दही पौष्टिक होने के बावजूद हर समय उपयुक्त नहीं है।

अब जानते हैं कि गर्मियों में दही के सेवन के सही नियम क्या हैं। दही पित्त दोष और कफ दोष को बढ़ाती है और इसका स्वाद भी खट्टा होता है। ऐसे में दही को दोपहर के भोजन के साथ लेना सही रहता है। अगर दही को मथकर लिया जाए तो यह शरीर के लिए और लाभकारी बन जाती है। छाछ या दही में हल्का मीठा शहद या खांड मिलाकर ले सकते हैं लेकिन नमक मिलाने से परहेज करें। आयुर्वेद में दही में मीठा मिलाकर खाने की सलाह दी जाती है लेकिन नमक नहीं, क्योंकि यह विरुद्ध आहार हो जाता है। इसके साथ ही सीधे फ्रिज से निकाला हुआ ठंडा दही खाने से पाचन प्रभावित हो सकता है।

चरक संहिता में विस्तार से बताया गया है कि दही का सेवन किन लोगों को करना चाहिए। दही का सेवन उन लोगों को करना चाहिए जिनका पाचन अच्छा हो, जो अधिक शारीरिक श्रम करते हो या फिर जो दुबले-पतले और कमजोरी महसूस करते हो। अगर आंतों या पेट में पित्त बढ़ने की समस्या रहती है, तब भी दही का सेवन किया जा सकता है लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि सर्दी-जुकाम से पीड़ित, कफ से पीड़ित, मुहांसों या फिर किसी प्रकार की त्वचा एलर्जी से पीड़ित लोगों को दही का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही, रात के समय भोजन में दही का इस्तेमाल न करें। इससे भारीपन, गैस या एसिडिटी बढ़ सकती है।

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