बदलती ऋतु के साथ खानपान में बदलाव करना बेहद जरूरी माना जाता है। 2 फरवरी से फाल्गुन मास की शुरुआत हो चुकी है, जो मार्च तक रहेगा। इस समय दिन में हल्की गर्माहट और रात में ठंडक रहती है। पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती हैं, जिससे सर्दी, जुकाम और वायरल संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार इस माह में शरीर में पित्त बढ़ने लगता है और कफ कम होता है। ऐसे में पाचन शक्ति थोड़ी कमजोर हो सकती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन लेने की सलाह दी जाती है।
किन चीजों से परहेज करें
चना: परंपरागत मान्यता है कि फाल्गुन में चना भारी पड़ सकता है। पाचन अग्नि कमजोर होने पर यह गैस और कब्ज की समस्या बढ़ा सकता है।
बासी और तामसिक भोजन: इस महीने को आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर Maha Shivaratri के कारण। इसलिए ताजा और सात्विक भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।
क्या खाएं
बेर और अंगूर: ये दोनों फल शरीर को ठंडक देते हैं, रक्त शुद्ध करने में मदद करते हैं और मौसमी बीमारियों से बचाव में सहायक माने जाते हैं।
हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन।
सुबह जल्दी उठकर हल्का व्यायाम या योग, ताकि शरीर सक्रिय रहे और प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बने।
मौसम के अनुसार आहार और दिनचर्या में संतुलित बदलाव करने से शरीर को दवाइयों के बिना भी स्वस्थ रखा जा सकता है। सही खानपान और नियमित दिनचर्या ही इस मौसम में ऊर्जा और संतुलन बनाए रखने की कुंजी है।