स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 30 की उम्र पार करने के बाद खानपान और दिनचर्या में छोटे लेकिन जरूरी बदलाव कई बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं। खास तौर पर मीठे और नमक की मात्रा घटाना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। हालांकि व्यस्त जीवनशैली के चलते इसे नियमित रूप से अपनाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता।
ऐसे में कुछ पारंपरिक और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मददगार साबित हो सकते हैं। आयुर्वेद में भी भोजन को औषधि के बराबर महत्व दिया गया है। संतुलित आहार न केवल मधुमेह के जोखिम को कम कर सकता है, बल्कि पहले से शुगर के मरीजों के लिए भी सहायक हो सकता है।
मैथी दाना और ओट्स
मैथी दाना और ओट्स को ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए अच्छा माना जाता है। इनमें मौजूद घुलनशील फाइबर जैसे बीटा-ग्लूकान और ग्लूकोमैनन शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं। साथ ही ये इंसुलिन रेजिस्टेंस को संतुलित रखने में भी भूमिका निभाते हैं।
दालचीनी और करेला
दालचीनी और करेला भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सप्ताह में दो-तीन बार करेले का सेवन और सीमित मात्रा में दालचीनी का उपयोग लाभकारी हो सकता है। ये शरीर की कोशिकाओं को सक्रिय कर ग्लूकोज के बेहतर उपयोग में मदद करते हैं।
दालें, अलसी, सत्तू और इसबगोल
इन खाद्य पदार्थों में फाइबर, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं।
लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल
अमरूद, सेब और नाशपाती जैसे फल मधुमेह के मरीजों के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ खानपान ही नहीं, बल्कि नियमित दिनचर्या भी उतनी ही जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट टहलना, हल्की एक्सरसाइज करना, प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय से दूरी रखना और पूरी नींद लेना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकता है
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