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तपस्या-तकनीक-श्रम का संगम…161 फीट ऊंचाई, 70 एकड़ में बने 3 मंजिला राम मंदिर की जानें खासियत

November 25, 2025

तपस्या-तकनीक-श्रम का संगम…161 फीट ऊंचाई, 70 एकड़ में बने 3 मंजिला राम मंदिर की जानें खासियत

धर्म डेस्क। अयोध्या आज फिर से राम भक्ति में रंग गई। राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहरा दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ध्वजारोहण किया। इसे मंदिर निर्माण की पूर्णता और सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक माना जा रहा है। प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिन बाद राम नगरी में फिर से जश्न जैसा माहौल देखा गया।

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धर्म ध्वज की ऊंचाई और खासियत

-ध्वज की ऊंचाई 161 फीट पर लगाई गई है

-इसका वजन 2 किलो है

-ध्वज की लंबाई 20 फीट और

-ध्वज स्तंभ 42 फीट ऊंचा है

-तेज हवा, बारिश और तूफान में भी यह ध्वज खराब नहीं होगा।

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कैसे बना यह खास ध्वज
इस केसरिया ध्वज को गुजरात के 6 कलाकारों ने 25 दिन में तैयार किया। ध्वज को मजबूत बनाने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

-पैराशूट नायलॉन कपड़ा

-ऊपर से डबल-कोटेड सिंथेटिक लेयर

-तापमान का असर नहीं होता

-हर मौसम में सुरक्षित रहता है

-ध्वज के स्तंभ पर सोने की कोटिंग की गई है।

बिना लोहे के राम मंदिर का हुआ है निर्माण  
राम मंदिर का निर्माण इस तरह किया गया है कि हजारों साल तक इसे कोई नुकसान न हो सके। सबसे बड़ी बात है कि मंदिर में एक भी लोहे की कील या स्टील का इस्तेमाल नहीं हुआ।

भूकंप भी रहेगा बेअसर
राम मंदिर बनाते समय इंजीनियरों ने पाइलिंग किए गए खंभों पर जब भूकंप जैसे झटके दिए तो खंभों में दरार आ गई। इसके चलते इंजीनियरों को पूरी नींव की डिजाइन फिर से बनानी पड़ी। इसमें छह महीने लग गए। नई नींव में आरसीसी का उपयोग किया गया। नींव इस तरह तैयार की गई है कि यह हजारों वर्षों तक बिना क्षति के टिक सके।

मजबूत नींव की तकनीक

मंदिर की नींव बेहद अनोखी है।

-56 लेयर में पत्थरों से बनी

-नींव की गहराई 40 फीट

-23,000 से अधिक पत्थर, मिट्टी, रेत और कंकड़ का मिश्रण

-लोहे की जगह तांबे का उपयोग

-पत्थरों को जोड़ने में इंटरलॉकिंग तकनीक अपनाई गई

-मंदिर का चबूतरा जमीन से 21 फीट ऊंचा है और पूरी तरह ग्रेनाइट से बना है, जो नमी रोकता है और भूकंप में भी सुरक्षित रहता है।

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कितना खर्च और किसने बनाया

मंदिर के निर्माण में 1,850 से 2,150 करोड़ रुपये खर्च हुए।

-निर्माण का काम लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने संभाला

-इंटीरियर का काम टाटा कंपनी ने किया

-पूरे निर्माण में 56 महीने लगे

-7000 से ज्यादा कारीगर और मजदूर दिन-रात जुड़े रहे

 

वैज्ञानिक टेस्टिंग और रिसर्च

मंदिर की नींव और संरचना की जांच देश की शीर्ष संस्थाओं ने की।

-सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट

-नेशनल जियोफिजिक्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI)

-IIT बॉम्बे, IIT गुवाहाटी और IIT मद्रास

इन संस्थानों ने मिट्टी की परतों का अध्ययन, भूकंप-रोधी डिजाइन, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान
में सहयोग दिया।

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