चंडीगढ़। निगम, पंचायत और नगर पालिका चुनावों व्यय पर्यवेक्षक प्रत्येक उम्मीदवार के होने वाले खर्च का निरीक्षण करेंगे। कम से कम प्रत्येक तीन दिन में लेखा का परीक्षण सुनिश्चित करना होगा।
निरीक्षण के बाद होगी रिपोर्ट पेश
सभी प्रत्याशियों को व्यय रजिस्टर के रख-रखाव, चुनाव खर्च की निर्धारित सीमा, निरीक्षण की तिथियों और रिपोर्ट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया के बारे में अवगत कराया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने सोमवार को समीक्षा बैठक में बताया कि प्रत्येक प्रत्याशी को नामांकन से लेकर परिणाम घोषणा तक अपने चुनाव खर्च का दिन-प्रतिदिन सही लेखा-जोखा रखना अनिवार्य है। सभी खर्च जैसे वाहन, ईंधन, प्रचार सामग्री, विज्ञापन, भोजन-पानी एवं अन्य चुनावी गतिविधियों पर होने वाला व्यय निर्धारित सीमा के अंतर्गत ही होना चाहिए।
आयोग की रहेगी सख्त नजर
मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नकदी, शराब, कपड़े या अन्य प्रलोभनों के वितरण पर सख्त नजर रखें। अवैध हथियारों, आपराधिक तत्वों एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण के साथ-साथ जहां ईवीएम मशीनें रखी गई हैं, उन स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि पर्यवेक्षक जिला प्रशासन की तैयारियों का निरंतर आकलन करें और किसी भी कमी को तुरंत आयोग के संज्ञान में लाएं। पर्यवेक्षक चुनाव प्रक्रिया पूर्ण होने तक अपने कार्यस्थल पर तैनात रहेंगे।
राजनीतिक दलों के सीधे संपर्क में रहेंगे पर्यवेक्षक
पर्यवेक्षक के ठहरने के स्थान और मोबाइल नंबर की जानकारी प्रेस एवं इलेक्ट्रानिक माध्यमों के जरिए आमजन तक उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे कि कोई भी मतदाता, उम्मीदवार या राजनीतिक दल अपनी शिकायत सीधे पर्यवेक्षक तक पहुंचा सके। मतदान कर्मियों और ईवीएम की रैंडमाइजेशन प्रक्रिया पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में ही की जाएगी। पर्यवेक्षक प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर मतदान केंद्रों पर कानून व्यवस्था और मतदाताओं के लिए आवश्यक सुविधाओं की समीक्षा करेंगे।
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