Captain Vikram Batra : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध के वीर नायक और परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा को उनके 26वें शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मां भारती के वीर सपूत की अद्वितीय वीरता और बलिदान को नमन किया। रक्षा मंत्री ने पोस्ट में लिखा, ‘कारगिल युद्ध के दौरान उनकी अद्वितीय वीरता और बलिदान राष्ट्र की सेवा में प्रेरणादायक साहस का एक अद्भुत उदाहरण है। उनके शहीदी दिवस पर उन्हें मेरी श्रद्धांजलि।
Remembering the supreme sacrifice made by Captain Vikram Batra on his Balidan Diwas. His unmatched bravery and sacrifice during the Kargil War remain a glorious example of courage in service of the nation. My tributes to him on his ‘Balidan Diwas’. pic.twitter.com/FlqaeTjX3M
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) July 7, 2025
पंजाब के CM ने कहा-
इसी तरह, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने संदेश में लिखा, ‘कारगिल युद्ध में देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा को उनकी शहादत की वर्षगांठ पर मेरा दिल से सलाम। भारतीय सेना के शेरशाह के रूप में जाने जाने वाले शहीद कैप्टन बत्रा का नाम और उनकी देशभक्ति की भावना हमेशा हमारे दिलों में बनी रहती है।
ਕਾਰਗਿਲ ਦੀ ਜੰਗ ‘ਚ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਰਾਖੀ ਲਈ ਆਪਣੀ ਜਾਨ ਵਾਰਨ ਵਾਲੇ ਪਰਮਵੀਰ ਚੱਕਰ ਵਿਜੇਤਾ ਕੈਪਟਨ ਵਿਕਰਮ ਬੱਤਰਾ ਜੀ ਨੂੰ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਸ਼ਹਾਦਤ ਦਿਵਸ ਮੌਕੇ ਦਿਲੋਂ ਸਲਾਮ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। ਭਾਰਤੀ ਫੌਜ ਦੇ ਸ਼ੇਰਸ਼ਾਹ ਕਹੇ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਸ਼ਹੀਦ ਕੈਪਟਨ ਬੱਤਰਾ ਜੀ ਦਾ ਨਾਮ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਦੇਸ਼ ਪ੍ਰਤੀ ਸੇਵਾ ਭਾਵਨਾ ਹਮੇਸ਼ਾ ਸਾਡੇ ਦਿਲਾਂ ਵਿੱਚ ਰਹੇਗੀ। pic.twitter.com/cRxEVYBmbw
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) July 7, 2025
अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने कहा-
कैप्टन विक्रम बत्रा को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चौना मीन ने लिखा, ‘कारगिल युद्ध में एक महान नायक ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनकी अद्वितीय बहादुरी, अमर शब्द और अदम्य भावना भारतीयों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।’ उन्होंने अंत में लिखा, ‘जय हिंद’।
जीवन परिचय-
बता दें, कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में हुआ था। उन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में देश के लिए साहस की पहचान दी। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स की डेल्टा कंपनी की कमान संभाली थी, ने अटौसी और प्वाइंट 5140 और प्वाइंट 4875 के कठिन ठिकानों पर तिरंगा फहराया।
‘ये दिल मांगे मोर’ पसंदीदा टैगलाइन-
उनकी मशहूर टैगलाइन ‘ये दिल मांगे मोर’ आज भी हर भारतीय के दिल में गूंजती है, जो उनके अदम्य साहस और जोश का प्रतीक है। 7 जुलाई 1999 को प्वाइंट 4875 पर यूनानियों की भारी गोलीबारी के बीच कैप्टन बटार ने अपने साथी लेफ्टिनेंट को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। इसी बीच वह जवान की गोली का शिकार हो गए और देश के लिए शहीद हो गए।