
पंचकूला। पूर्व उप-मुख्यमंत्री चंद्रमोहन ने राज्यसभा सदस्य और भाजपा नेता रेखा शर्मा को कानूनी नोटिस दिया है। रेखा शर्मा ने उनके दिवंगत पिता और पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल पर कथित टिप्पणी की थी। अब देखना ये होगा कि वह इस नोटिस का जवाब देती हैं या मामला अदालत पहुंचेगा।
25 अप्रैल को पंचकूला में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान रेखा शर्मा ने चंद्रमोहन और उनके पिता को बदमाश कहा था और उन पर बदमाशी के दम पर चुनाव जीतने की बात कहने के आरोप लगाए। नोटिस में कहा है कि पांच बार के विधायक चंद्रमोहन पांच बार चुने गए हैं और उनका कॅरिअर बेदाग है। पिता की विरासत, भजन लाल तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे और पूरे देश में सम्मान है। उनके लिए बदमाश जैसे शब्दों का प्रयोग निंदनीय है। नोटिस में यह भी तंज कसा है कि रेखा शर्मा खुद 2003 में पंचकूला नगर परिषद का चुनाव भारी मतों से हार गई थीं जबकि चंद्रमोहन ने हमेशा बड़ी जीत दर्ज की है।
पूर्व डिप्टी सीएम ने नोटिस से मांग की है कि वह 3 मई तक सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें और अपने शब्दों को वापस लें। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो उनके खिलाफ मानहानि का आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और हर्जाने का सिविल सूट भी फाइल किया जाएगा।
राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा की विवादित टिप्पणी ने तूल पकड़ लिया। बिश्नोई सभा, हिसार के पदाधिकारियों ने एक पत्रकारवार्ता आयोजित कर इस पर कड़ा रोष जताया और रेखा शर्मा से तुरंत माफी मांगने की बात कही। बिश्नोई सभा के प्रधान जगदीश कड़वासरा ने कहा कि पंचकूला नगर निगम चुनाव के दौरान रेखा शर्मा ने चौधरी भजनलाल के शासनकाल को ‘गुंडागर्दी’ वाला बताकर अपनी गिरी हुई मानसिकता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा, “स्वर्गीय भजनलाल जी ने अपना पूरा जीवन जनसेवा और प्रदेश के विकास में लगाया। उनके बारे में ऐसी तुच्छ भाषा का इस्तेमाल करना न केवल गलत है, बल्कि उनके संस्कारों पर भी सवाल खड़े करता है।
पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के शासनकाल पर दिए बयान पर रेखा शर्मा ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनके बयानों को गलत तरीके से पेश किया है और उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की गरिमा को ठेस पहुंचाना नहीं था। रेखा शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने भाषण के दौरान जो कहा था, वह तत्कालीन सरकार के काम करने के तरीके के बारे में था। उन्होंने कहा कि कई बार काम करने का तरीका और व्यक्ति एक ही हो जाते हैं। जब आप व्यवस्था की आलोचना करते हैं, तो नाम लेना मजबूरी बन जाता है।
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