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Chandrayaan-3 Mission को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, AIAA ने दिया गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड

नेशनल डेस्क: भारत के चंद्रयान-3 मिशन को एक और बड़ी वैश्विक उपलब्धि हासिल हुई है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स यानी AIAA ने चंद्रयान-3 मिशन को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान 21 मई को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि को भारत के अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी क्षमता के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

Chandrayaan-3 Mission
 

चंद्रयान-3 ने रचा था इतिहास

भारत ने 23 अगस्त 2023 को अंतरिक्ष क्षेत्र में इतिहास रच दिया था, जब चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। इसके साथ ही भारत दुनिया का पहला देश बन गया था, जिसने चंद्रमा के इस हिस्से तक सफलतापूर्वक पहुंच बनाई। चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव वैज्ञानिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में पहले कोई भी मिशन सफलतापूर्वक नहीं पहुंच पाया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां पानी की बर्फ और कई महत्वपूर्ण खनिज मौजूद हो सकते हैं, जो भविष्य के मानव मिशनों के लिए काफी उपयोगी साबित होंगे। मिशन के दौरान जुटाए गए आंकड़ों से चंद्रमा की सतह, मिट्टी और वहां मौजूद रासायनिक तत्वों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इससे भविष्य में चंद्रमा पर निर्माण कार्य और अन्य वैज्ञानिक गतिविधियों की संभावनाओं को भी बल मिला है।

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इसरो ने स्वीकार किया सम्मान

यह पुरस्कार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर से अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने AIAA ASCEND 2026 सम्मेलन के दौरान स्वीकार किया। अपने संबोधन में विनय क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्पेस विजन 2047’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत गहरे अंतरिक्ष की खोज, मानव अंतरिक्ष उड़ान और तेजी से बढ़ते कमर्शियल स्पेस सेक्टर में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। साथ ही सरकारों, उद्योगों और शोध संस्थानों के बीच साझेदारी बढ़ाने की बात कही।

 

क्यों खास है यह अवॉर्ड?

‘गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड’ को AIAA का अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार उन वैज्ञानिकों, इंजीनियरों या टीमों को दिया जाता है जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान में असाधारण योगदान दिया हो, जब यह सम्मान किसी टीम को दिया जाता है, तब उसमें शामिल प्रमुख योगदानकर्ताओं की सूची तैयार की जाती है और अधिकतम दो प्रतिनिधि औपचारिक रूप से पुरस्कार ग्रहण करते हैं।

रॉकेट विज्ञान के वैज्ञानिक की याद में शुरू हुआ सम्मान

इस पुरस्कार की स्थापना रॉबर्ट एच. गोडार्ड की स्मृति में की गई थी। रॉबर्ट एच. गोडार्ड को आधुनिक रॉकेट विज्ञान का अग्रणी वैज्ञानिक माना जाता है। उन्होंने शुरुआती दौर में तरल ईंधन वाले रॉकेट प्रक्षेपणों पर काम किया था, जिसने आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान की नींव रखी। बाद में वर्ष 1975 में इस पुरस्कार को वर्तमान स्वरूप दिया गया। उसी समय पुराने ‘गोडार्ड अवॉर्ड’ का नाम बदलकर इसकी चयन प्रक्रिया और दायरे का विस्तार भी किया गया। भारत के लिए यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में देश की बढ़ती ताकत और वैश्विक पहचान का प्रतीक माना जा रहा है।

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