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बेटी को मौत की सजा से बचाने के लिए यमन जाने की इजाजत मांग रही महिला की याचिका पर केंद्र को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस

December 3, 2023

बेटी को मौत की सजा से बचाने के लिए यमन जाने की इजाजत मांग रही महिला की याचिका पर केंद्र को दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शनिवार को हुई एक विशेष सुनवाई में केरल की एक महिला द्वारा यमन की यात्र की सुविधा की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, ताकि पीड़ित परिवार के साथ ब्लड मनी का भुगतान करने के बारे में बातचीत की जा सके। महिला पश्चिम एशियाई देश में रह रही अपनी बेटी को मौत की सजा से बचाना चाहती है।

यमन में एक यमनी नागरिक की हत्या के लिए मौत की सजा पाने वाली भारतीय नागरिक निमिषा प्रिया की मां द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने याचिकाकर्ता को यमन जाने की अनुमति नहीं दी और उसे व उसके साथ आए अन्य लोगों को इस समय उस देश में न जाने की सलाह दी।मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ को अवगत कराया गया कि अब बेटी की जान बचाने का एकमात्र तरीका पीड़िता के परिवार से ब्लड मनी देकर माफी प्राप्त करना है।

यह उल्लेख करने की जरूरत है कि केंद्र की एक यात्र भारतीय नागरिकों को यमन जाने से रोक रही है।पहले की सुनवाई में केंद्र के वरिष्ठ स्थायी वकील ने मौखिक रूप से उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि यमन के सर्वोच्च न्यायालय ने 13 नवंबर को प्रिया द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया था।प्रिया की मां का मानना है कि उनकी बेटी को मौत की सजा से बचाने का एकमात्र तरीका मृतक के परिवार के साथ ब्लड मनी की पेशकश करके बातचीत करनी है। हालांकि, यात्र पर प्रतिबंध के कारण वह फिलहाल ऐसा करने में असमर्थ हैं।

आरोप है कि यमन में नर्स के रूप में काम करने वाली प्रिया ने अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए तलाल अब्दो महदी को बेहोशी की दवा का इंजेक्शन लगाया था, जो उसके पास था।कथित तौर पर उसे महदी के हाथों र्दुव्यंवहार और यातना का सामना करना पड़ा था। उसने पासपोर्ट भी छीन लिया था।पिछले साल, एक समन्वय पीठ ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि वह यमनी कानून के अनुसार ब्लड मनी का भुगतान करके प्रिया को मौत की सजा से बचाने के लिए पीड़ित के परिवार के साथ बातचीत की सुविधा प्रदान करे।इसके बाद, एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश के खिलाफ अपील को एक खंडपीठ ने खारिज कर दिया।

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