यूपी डेस्क। राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व सांसद और प्रसिद्ध संत डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार को साकेतवास (निधन) हो गया। मध्य प्रदेश के रीवा में चल रहे एक रामकथा महोत्सव के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे। डॉ. वेदांती 10 दिसंबर को दिल्ली से रीवा पहुंचे थे, जहां उनकी रामकथा चल रही थी। बीमार पड़ने के बाद पिछले दो दिनों से उनका वहीं इलाज चल रहा था। सोमवार सुबह उन्हें दिल्ली ले जाने के लिए एयर एंबुलेंस पहुंची, लेकिन घने कोहरे के कारण वह लैंड नहीं कर सकी। इसी बीच उनका देहांत हो गया।
अयोध्या पहुंचेगा पार्थिव शरीर
डॉ. रामविलास दास वेदांती का पार्थिव शरीर देर शाम तक अयोध्या लाया जाएगा। उनके उत्तराधिकारी और शिष्य महंत राघवेश दास वेदांती ने बताया कि मंगलवार सुबह 10 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इस अंतिम यात्रा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना है।
राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी संत
डॉ. रामविलास दास वेदांती 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। वे सीएम योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवेद्य नाथ और रामचंद्र दास परमहंस के साथ आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को हुए विवादित ढांचा विध्वंस मामले में उनका नाम भी प्रमुख आरोपियों में शामिल था।
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ढांचा विध्वंस केस में बयान
सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने अंतिम फैसले में डॉ. वेदांती सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत में दिए अपने बयान में डॉ. वेदांती ने कहा था कि उन्होंने किसी मस्जिद को नहीं, बल्कि मंदिर के खंडहर को हटाया था। उनका कहना था कि वहां राजा विक्रमादित्य द्वारा बनवाया गया प्राचीन मंदिर था।
दो बार सांसद रहे
डॉ. रामविलास दास वेदांती भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर दो बार सांसद चुने गए। वर्ष 1996 में वे मछली शहर लोकसभा सीट से सांसद बने और 1998 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से संसद पहुंचे। 12वीं लोकसभा में उन्होंने सांसद के रूप में अपनी भूमिका निभाई।
रामजन्मभूमि न्यास में अहम जिम्मेदारी
राम मंदिर आंदोलन को मजबूती देने के कारण उन्हें राम मंदिर जन्मभूमि न्यास का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। वे लंबे समय तक इस जिम्मेदारी को निभाते रहे और आंदोलन को दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
हनुमानगढ़ी के संत और विद्वान
डॉ. वेदांती हनुमानगढ़ी के महंत और राम मंदिर उद्धारक महंत अभिराम दास के शिष्य थे। वे अयोध्या के नयाघाट स्थित हिंदू धाम में रहते थे। उनका ‘वशिष्ठ भवन’ नाम का आश्रम भी है। उन्होंने कई दशकों तक रामलला और हनुमानगढ़ी के सामने रामकथा का वाचन किया। वे संस्कृत के प्रख्यात विद्वान और प्रसिद्ध रामकथा व्याख्याता थे।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
डॉ. रामविलास दास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़वा गांव में हुआ था। संत जीवन अपनाने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन रामभक्ति, रामकथा और राम मंदिर आंदोलन को समर्पित कर दिया।
उनके योगदान और विचारों को लंबे समय तक याद किया जाएगा
डॉ. रामविलास दास वेदांती के निधन से राम मंदिर आंदोलन और संत समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनके योगदान और विचारों को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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